अनकही राहें, खोया हुआ दिल
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ट्रेन अपनी रफ़्तार से चली जा रही थी। खिड़की से बाहर धुंधला सा नज़ारा दिख रहा था - खेत, गांव, सब कुछ धुंध में लिपटा हुआ। मैं अपने सीट पर बैठी, ऊब रही थी। तभी, बगल वाली सीट पर एक लड़की आकर बैठी। उसने लाल रंग का एक ऊनी स्कार्फ ओढ़ा हुआ था, जो उसकी गोरी त्वचा पर बहुत खिल रहा था। उसका नाम मीरा था। हमने बातें शुरू कीं, और जल्द ही पता चला कि हम दोनों एक ही शहर से हैं, और एक ही कॉलेज में पढ़ती थीं। हालाँकि, हम कभी मिली नहीं थीं।
कुछ देर बाद, एक लड़का भी हमारे डिब्बे में चढ़ा। लंबा, सांवला, और उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी। उसका नाम अर्जुन था। मीरा उसे देखते ही मुस्कुराई। “अरे, अर्जुन! तुम यहाँ?” उसने पूछा। अर्जुन भी मुस्कुराया। “हाँ, मीरा। मैं तुम्हें सरप्राइज देना चाहता था।”
मुझे समझ में आ गया कि इन दोनों के बीच कुछ तो है। शायद प्यार। और फिर, मुझे याद आया - अर्जुन, वो तो कॉलेज में मीरा का सबसे अच्छा दोस्त था। उन दोनों के बारे में तो बहुत बातें होती थीं।
हम तीनों बातें करने लगे। अर्जुन और मीरा के बीच की केमिस्ट्री साफ़ दिख रही थी। वो एक दूसरे को छेड़ रहे थे, हँस रहे थे, और उनकी आँखों में एक दूसरे के लिए प्यार साफ़ झलक रहा था। मैं बस चुपचाप सुन रही थी, और मुझे थोड़ा अजीब लग रहा था। क्यों, ये मैं भी नहीं जानती।
फिर, अचानक, मीरा को एहसास हुआ कि उसका स्कार्फ गायब है। “अरे! मेरा स्कार्फ कहाँ गया?” उसने परेशान होकर कहा। हमने सब जगह ढूंढा, लेकिन स्कार्फ कहीं नहीं मिला।
अर्जुन ने कहा, “चिंता मत करो, मीरा। मैं तुम्हें दूसरा स्कार्फ दिला दूंगा।”
लेकिन मीरा उदास थी। “यह स्कार्फ मेरे लिए बहुत खास था। मेरी दादी ने इसे मेरे लिए बुना था।”
मुझे अचानक एक विचार आया। मैंने अपनी बैग खोली, और उसमें से अपना एक शॉल निकाला। “ये लो, मीरा। तुम इसे ओढ़ लो। यह भले ही तुम्हारी दादी का स्कार्फ नहीं है, लेकिन यह तुम्हें गर्म रखेगा।”
मीरा ने मेरा शॉल ले लिया, और मुझे धन्यवाद दिया। लेकिन उसकी आँखों में अभी भी उदासी थी।
रात हो गई। हम तीनों सो गए। सुबह जब मैं उठी, तो मैंने देखा कि मीरा और अर्जुन एक दूसरे के करीब बैठे हुए हैं, और अर्जुन मीरा को कुछ कह रहा है। मीरा हँस रही थी।
तभी, अर्जुन ने मुझे देखा। “अरे! सुनो, कल रात जब तुम सो रही थी, तो मुझे ये स्कार्फ मिला। ये तुम्हारी सीट के नीचे गिरा हुआ था।” उसने मीरा का लाल स्कार्फ मुझे दिया।
मैं हैरान थी। “ये… ये तो मीरा का स्कार्फ है!”
अर्जुन ने मुस्कुराते हुए कहा, “हाँ। मुझे लगा कि शायद गलती से गिर गया होगा।”
मैंने स्कार्फ मीरा को दे दिया। मीरा बहुत खुश हुई। उसने मुझे और अर्जुन दोनों को धन्यवाद दिया।
ट्रेन अपने गंतव्य पर पहुँच गई। हम तीनों स्टेशन पर उतरे। मीरा और अर्जुन एक साथ चले गए। मैं अकेली रह गई।
मुझे पता नहीं था कि क्यों, लेकिन मुझे थोड़ा दुख हो रहा था। शायद इसलिए कि मैं भी मीरा की तरह किसी के प्यार में पड़ना चाहती थी। शायद इसलिए कि मुझे भी किसी का स्कार्फ ढूंढने का मौका नहीं मिला। शायद इसलिए कि... शायद इसलिए कि मुझे अर्जुन थोड़ा पसंद आने लगा था। एक अनकही राह, एक खोया हुआ दिल, और एक उलझा हुआ एहसास। ये ट्रेन की यात्रा मेरे लिए एक अजीब सी याद बन गई।
कुछ देर बाद, एक लड़का भी हमारे डिब्बे में चढ़ा। लंबा, सांवला, और उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी। उसका नाम अर्जुन था। मीरा उसे देखते ही मुस्कुराई। “अरे, अर्जुन! तुम यहाँ?” उसने पूछा। अर्जुन भी मुस्कुराया। “हाँ, मीरा। मैं तुम्हें सरप्राइज देना चाहता था।”
मुझे समझ में आ गया कि इन दोनों के बीच कुछ तो है। शायद प्यार। और फिर, मुझे याद आया - अर्जुन, वो तो कॉलेज में मीरा का सबसे अच्छा दोस्त था। उन दोनों के बारे में तो बहुत बातें होती थीं।
हम तीनों बातें करने लगे। अर्जुन और मीरा के बीच की केमिस्ट्री साफ़ दिख रही थी। वो एक दूसरे को छेड़ रहे थे, हँस रहे थे, और उनकी आँखों में एक दूसरे के लिए प्यार साफ़ झलक रहा था। मैं बस चुपचाप सुन रही थी, और मुझे थोड़ा अजीब लग रहा था। क्यों, ये मैं भी नहीं जानती।
फिर, अचानक, मीरा को एहसास हुआ कि उसका स्कार्फ गायब है। “अरे! मेरा स्कार्फ कहाँ गया?” उसने परेशान होकर कहा। हमने सब जगह ढूंढा, लेकिन स्कार्फ कहीं नहीं मिला।
अर्जुन ने कहा, “चिंता मत करो, मीरा। मैं तुम्हें दूसरा स्कार्फ दिला दूंगा।”
लेकिन मीरा उदास थी। “यह स्कार्फ मेरे लिए बहुत खास था। मेरी दादी ने इसे मेरे लिए बुना था।”
मुझे अचानक एक विचार आया। मैंने अपनी बैग खोली, और उसमें से अपना एक शॉल निकाला। “ये लो, मीरा। तुम इसे ओढ़ लो। यह भले ही तुम्हारी दादी का स्कार्फ नहीं है, लेकिन यह तुम्हें गर्म रखेगा।”
मीरा ने मेरा शॉल ले लिया, और मुझे धन्यवाद दिया। लेकिन उसकी आँखों में अभी भी उदासी थी।
रात हो गई। हम तीनों सो गए। सुबह जब मैं उठी, तो मैंने देखा कि मीरा और अर्जुन एक दूसरे के करीब बैठे हुए हैं, और अर्जुन मीरा को कुछ कह रहा है। मीरा हँस रही थी।
तभी, अर्जुन ने मुझे देखा। “अरे! सुनो, कल रात जब तुम सो रही थी, तो मुझे ये स्कार्फ मिला। ये तुम्हारी सीट के नीचे गिरा हुआ था।” उसने मीरा का लाल स्कार्फ मुझे दिया।
मैं हैरान थी। “ये… ये तो मीरा का स्कार्फ है!”
अर्जुन ने मुस्कुराते हुए कहा, “हाँ। मुझे लगा कि शायद गलती से गिर गया होगा।”
मैंने स्कार्फ मीरा को दे दिया। मीरा बहुत खुश हुई। उसने मुझे और अर्जुन दोनों को धन्यवाद दिया।
ट्रेन अपने गंतव्य पर पहुँच गई। हम तीनों स्टेशन पर उतरे। मीरा और अर्जुन एक साथ चले गए। मैं अकेली रह गई।
मुझे पता नहीं था कि क्यों, लेकिन मुझे थोड़ा दुख हो रहा था। शायद इसलिए कि मैं भी मीरा की तरह किसी के प्यार में पड़ना चाहती थी। शायद इसलिए कि मुझे भी किसी का स्कार्फ ढूंढने का मौका नहीं मिला। शायद इसलिए कि... शायद इसलिए कि मुझे अर्जुन थोड़ा पसंद आने लगा था। एक अनकही राह, एक खोया हुआ दिल, और एक उलझा हुआ एहसास। ये ट्रेन की यात्रा मेरे लिए एक अजीब सी याद बन गई।
About This Story
Genres: Romance
Description: A lost scarf unravels more than just yarn on a long train journey, tangling two hearts with a shared past and a new, unexpected arrival.