जड़ें सूखती धरती की

By Amit Kumar Pawar | 2026-01-24 | 1 min read

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धूप तेज थी, सड़क सुनसान,
एक बूढ़ा आदमी, हाथों में सामान।
लड़खड़ाते कदम, झुकी हुई कमर,
जैसे किसी बोझ तले, टूट रहा हो अंदर।

मैंने पूछा, “बाबा, कहाँ जा रहे हो?”
आँखों में नमी, धीरे से बोले,
“शहर से निकाला, गाँव भी छूटा,
अब कहाँ जाऊँ, ये नसीब है झूठा।”

ये कैसी हवा है, जो सब कुछ उड़ा ले जाती है?
जड़ों को सींचने वाली, धूप क्यों जलाती है?

कल एक बच्ची देखी, नंगे पाँव,
स्कूल की जगह, ईंटों का गाँव।
किताबों की जगह, मिट्टी के खिलौने,
उम्र से पहले ही, जिम्मेदारियों के साये।

उसकी आँखों में सवाल थे अनगिनत,
पर जवाब देने वाला, कोई नहीं था जगत।
क्या ये ही है इंसाफ, क्या यही है विधान?
गरीबों के लिए बस, दुख और अपमान?

ये कैसी रोशनी है, जो अँधेरा बढ़ाती है?
भविष्य की उम्मीदों को, क्यों मार जाती है?

एक किसान मिला, खेत में अकेला,
सूखी धरती, उदास चेहरा।
कर्ज के बोझ तले, दबा हुआ,
जैसे जिंदगी से ही, हारा हुआ।

उसकी मेहनत का फल, कोई और ले गया,
उसकी उम्मीदों का बीज, बंजर रह गया।
क्या ये ही है न्याय, क्या ये है सच्चाई?
मेहनत करने वालों को, मिलती है बस तन्हाई?

ये कैसी बारिश है, जो प्यास नहीं बुझाती?
किसानों की मेहनत को, क्यों मिट्टी में मिलाती?

मैं देखता हूँ, ये सब हर रोज़,
दिल में उठता है, एक गहरा अफ़सोस।
कब बदलेगा ये मंज़र, कब बदलेगा ये हाल?
कब मिलेगा सबको, बराबरी का सवाल?

कब सूखती जड़ों को, पानी मिलेगा?
कब हर बच्चे को, आसमान मिलेगा?
कब हर किसान को, सम्मान मिलेगा?
कब हर इंसान को, इंसान मिलेगा?

मुझे पता है, राह आसान नहीं है,
पर चुप रहना भी, समाधान नहीं है।
उठना होगा, आवाज़ उठानी होगी,
इंसाफ की मशाल, जलानी होगी।

अपने हिस्से की, मोमबत्ती जलानी होगी,
अँधेरे से लड़ने की, ठानी होगी।
क्योंकि जब तक, एक भी बच्चा भूखा है,
जब तक एक भी किसान दुखी है,
जब तक एक भी इंसान बेघर है,
तब तक, ये देश अधूरा है।

आओ मिलकर, इसे पूरा करें,
एक बेहतर कल का, सपना बुनें।
जड़ों को सींचे, धरती को हरा करें,
इंसाफ की रोशनी से, जहाँ को भरें।

About This Story

Genres: Poetry

Description: A poem about witnessing social injustice and feeling the pain of those marginalized, urging action and change from a personal perspective. It speaks of the slow erosion of rights and dignity, like a tree dying from its roots.