स्वर्णवन का शाप और दूसरा अवसर

By Amit Kumar Pawar | 2026-01-29 | 2 min read

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स्वर्णवन, अपने नाम के अनुरूप, सुनहरे पत्तों वाले पेड़ों से ढका हुआ था। ये पत्ते सिर्फ सुंदर नहीं थे; वे स्वर्णवन के हर प्रेमी जोड़े की कहानियों को अपने भीतर समेटे हुए थे। इस वन में, दस साल बाद, अनन्या और विक्रम फिर से मिले। दस साल पहले, वे युवा और प्यार में पागल थे, लेकिन परिस्थितियाँ ऐसी बनीं कि उन्हें अलग होना पड़ा। विक्रम, उस समय एक महत्वाकांक्षी चित्रकार था, और अनन्या, एक लेखिका बनने का सपना देखती थी। विक्रम को शहर जाना पड़ा, अपने सपनों को पूरा करने के लिए, और अनन्या को अपनी बीमार माँ की देखभाल के लिए गाँव में ही रुकना पड़ा।

"अनन्या?" विक्रम ने धीरे से कहा, उसकी आवाज़ में हैरानी और खुशी घुली हुई थी।

अनन्या ने मुड़कर देखा। विक्रम दस साल पहले जैसा नहीं था; उसके चेहरे पर अनुभव की रेखाएँ थीं, लेकिन उसकी आँखों में वही पुरानी चमक थी। "विक्रम," उसने उत्तर दिया, उसकी आवाज़ भीगी हुई थी।

उन्होंने कुछ देर तक ख़ामोशी से एक-दूसरे को देखा। फिर, विक्रम ने कहा, "मुझे पता है कि मैंने तुम्हें दुख पहुँचाया। मुझे माफ कर दो।"

अनन्या ने एक गहरी सांस ली। "मैंने तुम्हें माफ़ कर दिया है, विक्रम। लेकिन दर्द अभी भी यहीं है," उसने अपने दिल की ओर इशारा करते हुए कहा।

वे स्वर्णवन में घूमते रहे, पुरानी यादें ताज़ा करते रहे। विक्रम ने बताया कि कैसे उसने शहर में अपनी पहचान बनाई, कैसे उसकी पेंटिंग्स मशहूर हुईं। अनन्या ने बताया कि कैसे उसने अपनी माँ की देखभाल की, कैसे उसने लिखना जारी रखा, और कैसे उसकी एक किताब प्रकाशित हुई।

फिर, विक्रम ने अनन्या को एक प्रस्ताव दिया। "मेरे साथ चलो, अनन्या। शहर चलो। हम एक नई शुरुआत कर सकते हैं।"

अनन्या का दिल धड़कने लगा। वह हमेशा से विक्रम के साथ रहना चाहती थी, लेकिन वह जानती थी कि यह आसान नहीं होगा। "विक्रम, मैं जाना चाहती हूँ, पर..."

"क्या हुआ?" विक्रम ने पूछा, उसकी आवाज़ में चिंता थी।

"स्वर्णवन का एक शाप है," अनन्या ने कहा। "जो भी प्रेमी इस वन में फिर से मिलता है, उसे एक कठिन चुनाव करना होता है। यदि वे साथ रहने का फैसला करते हैं, तो उनमें से एक को अपनी प्रतिभा का त्याग करना होगा।"

विक्रम हैरान रह गया। "यह कैसा शाप है?"

"यह वन की शक्ति है," अनन्या ने समझाया। "यह प्रेम की परीक्षा है। यह देखता है कि कौन अपने प्यार के लिए त्याग करने को तैयार है।"

विक्रम और अनन्या दोनों मुश्किल में फंस गए। विक्रम अपनी पेंटिंग को नहीं छोड़ सकता था, और अनन्या अपनी लेखन को नहीं छोड़ सकती थी। वे दोनों अपने सपनों को हासिल करने के लिए बहुत मेहनत कर चुके थे।

उन्होंने कई दिनों तक इस बारे में सोचा। वे जानते थे कि उनका फैसला उनके भविष्य को हमेशा के लिए बदल देगा।

अंत में, अनन्या ने फैसला किया। "मैं तुम्हारे साथ नहीं जा सकती, विक्रम," उसने कहा, उसकी आँखों में आँसू थे। "मैं अपनी लेखन को नहीं छोड़ सकती। यह मेरा जीवन है।"

विक्रम ने अनन्या के आँसू पोंछे। "मैं समझता हूँ," उसने कहा। "और मैं तुम्हें अपनी पेंटिंग छोड़ने के लिए नहीं कह सकता।"

उन्होंने एक-दूसरे को गले लगाया, जानते हुए कि यह शायद आखिरी बार है जब वे इस तरह मिलेंगे। स्वर्णवन के पत्तों ने उनकी कहानी को अपने भीतर समेट लिया, एक ऐसी कहानी जो प्रेम, त्याग और एक कठिन चुनाव की थी। वे अलग हो गए, अपने-अपने रास्तों पर, लेकिन स्वर्णवन की यादें हमेशा उनके दिलों में रहेंगी।

About This Story

Genres: Romance

Description: एक जादुई वन में, जहाँ स्वर्ण पत्तियाँ शापित प्रेम कहानियों की गवाह हैं, दो पूर्व प्रेमी एक बार फिर मिलते हैं, लेकिन उन्हें एक ऐसा चुनाव करना होगा जो उनके भविष्य को हमेशा के लिए बदल देगा।