कालभैरव की छाया
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गाँव सो रहा था। गहरी नींद में डूबा हुआ, मानो कालभैरव के मंदिर की छाया में सिमट गया हो। डॉक्टर रविंद्र, अपनी छोटी सी डिस्पेंसरी में, पसीने से तरबतर, एक बूढ़ी महिला की नब्ज़ टटोल रहा था। रात के दो बज रहे थे।
"डॉक्टर साहब, मेरी जान बचा लो।" महिला कराह रही थी। "ये दर्द... ये दर्द मुझे मार डालेगा।"
रविंद्र ने उसे शांत करने की कोशिश की, लेकिन उसके चेहरे पर चिंता की लकीरें गहरी होती जा रही थीं। पिछले कुछ दिनों से, गाँव में ऐसे ही रहस्यमय दर्द से पीड़ित लोगों की संख्या बढ़ रही थी। बुखार नहीं, कोई ज़ाहिरी चोट नहीं, बस असहनीय पीड़ा।
"मैंने तुम्हें दर्द निवारक दवा दी है, अम्मा।" रविंद्र ने कहा। "सुबह तक तुम बेहतर महसूस करोगी।"
लेकिन रविंद्र जानता था कि वह झूठ बोल रहा था। ये कोई आम बीमारी नहीं थी। ये कुछ और ही था, कुछ बहुत बुरा।
अगली सुबह, रविंद्र ने गाँव के मुखिया, ठाकुर विक्रम सिंह को जगाया। "ठाकुर साहब, बात गंभीर है। गाँव में एक रहस्यमय बीमारी फैल रही है। हमें कुछ करना होगा।"
ठाकुर विक्रम सिंह ने रविंद्र को घूर कर देखा। उनकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी। "ये सब तुम्हारा वहम है, रविंद्र। गाँव में सब ठीक है।"
"लेकिन ठाकुर साहब, लोग मर रहे हैं!" रविंद्र ने विरोध किया।
"चुप रहो!" ठाकुर सिंह दहाड़े। "इस बारे में एक शब्द भी मत कहना। कालभैरव की कृपा से, सब ठीक हो जाएगा।"
रविंद्र समझ गया। ठाकुर सिंह कुछ छुपा रहे थे। कालभैरव का मंदिर... गाँव के लोग मंदिर के बारे में बात करने से भी डरते थे। किंवदंतियों के अनुसार, मंदिर में एक प्राचीन रहस्य छिपा था, एक ऐसा रहस्य जिसे ठाकुर सिंह हर कीमत पर बचाना चाहते थे।
रविंद्र के मन में एक दुविधा थी। क्या उसे गाँव के लोगों की जान बचानी चाहिए, या ठाकुर सिंह के परिवार के सदियों पुराने रहस्य को बरकरार रखना चाहिए? समय तेजी से बीत रहा था। हर बीतते पल के साथ, गाँव में और लोग बीमार पड़ रहे थे।
उसने फैसला कर लिया। वह चुप नहीं रहेगा।
उस रात, रविंद्र ने चुपके से कालभैरव के मंदिर में प्रवेश किया। मंदिर की गहरी शांति में, उसे एक गुप्त दरवाजा मिला। दरवाजे के पीछे, एक अंधेरी सुरंग थी।
सुरंग के अंत में, उसे एक कुआँ मिला। कुएँ का पानी काला और दुर्गंधपूर्ण था। रविंद्र समझ गया। गाँव की बीमारी का स्रोत यही था। ठाकुर सिंह ने जानबूझकर कुएँ के पानी को दूषित किया था, ताकि मंदिर के रहस्य को छुपाया जा सके।
लेकिन क्यों? रहस्य क्या था?
अचानक, उसने ठाकुर सिंह को अपनी ओर आते देखा। ठाकुर सिंह के हाथ में एक तलवार थी, और उसकी आँखों में हत्या का इरादा।
"तुमने यह नहीं करना चाहिए था, रविंद्र।" ठाकुर सिंह ने कहा। "अब तुम्हें इसकी कीमत चुकानी होगी।"
रविंद्र ने भागने की कोशिश की, लेकिन ठाकुर सिंह ने उसे पकड़ लिया। तलवार चमकी, और रविंद्र को दर्द का एक तीव्र एहसास हुआ।
लेकिन रविंद्र ने हार नहीं मानी। उसने ठाकुर सिंह पर हमला किया, और दोनों अंधेरी सुरंग में लड़ते रहे। आखिरकार, रविंद्र ने ठाकुर सिंह को कुएँ में धकेल दिया।
ठाकुर सिंह की चीखें अंधेरे में गूंज उठीं, फिर खामोश हो गईं।
रविंद्र, बुरी तरह से घायल, गाँव वापस लौटा। उसने लोगों को कुएँ के बारे में बताया, और उन्हें पानी का उपयोग करने से मना कर दिया।
गाँव के लोग चकित थे, लेकिन उन्होंने रविंद्र की बात मानी। जल्द ही, बीमारी फैलना बंद हो गई।
रविंद्र, कमजोर और थका हुआ, अपनी डिस्पेंसरी में गिर गया। उसने गाँव को बचाया था, लेकिन उसे अपनी जान की कीमत चुकानी पड़ी थी।
अगली सुबह, गाँव के लोग रविंद्र को जगाने आए, लेकिन वह अब नहीं रहा। वह कालभैरव की छाया में हमेशा के लिए सो गया था। लेकिन उसकी बहादुरी और बलिदान को गाँव कभी नहीं भूलेगा।
"डॉक्टर साहब, मेरी जान बचा लो।" महिला कराह रही थी। "ये दर्द... ये दर्द मुझे मार डालेगा।"
रविंद्र ने उसे शांत करने की कोशिश की, लेकिन उसके चेहरे पर चिंता की लकीरें गहरी होती जा रही थीं। पिछले कुछ दिनों से, गाँव में ऐसे ही रहस्यमय दर्द से पीड़ित लोगों की संख्या बढ़ रही थी। बुखार नहीं, कोई ज़ाहिरी चोट नहीं, बस असहनीय पीड़ा।
"मैंने तुम्हें दर्द निवारक दवा दी है, अम्मा।" रविंद्र ने कहा। "सुबह तक तुम बेहतर महसूस करोगी।"
लेकिन रविंद्र जानता था कि वह झूठ बोल रहा था। ये कोई आम बीमारी नहीं थी। ये कुछ और ही था, कुछ बहुत बुरा।
अगली सुबह, रविंद्र ने गाँव के मुखिया, ठाकुर विक्रम सिंह को जगाया। "ठाकुर साहब, बात गंभीर है। गाँव में एक रहस्यमय बीमारी फैल रही है। हमें कुछ करना होगा।"
ठाकुर विक्रम सिंह ने रविंद्र को घूर कर देखा। उनकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी। "ये सब तुम्हारा वहम है, रविंद्र। गाँव में सब ठीक है।"
"लेकिन ठाकुर साहब, लोग मर रहे हैं!" रविंद्र ने विरोध किया।
"चुप रहो!" ठाकुर सिंह दहाड़े। "इस बारे में एक शब्द भी मत कहना। कालभैरव की कृपा से, सब ठीक हो जाएगा।"
रविंद्र समझ गया। ठाकुर सिंह कुछ छुपा रहे थे। कालभैरव का मंदिर... गाँव के लोग मंदिर के बारे में बात करने से भी डरते थे। किंवदंतियों के अनुसार, मंदिर में एक प्राचीन रहस्य छिपा था, एक ऐसा रहस्य जिसे ठाकुर सिंह हर कीमत पर बचाना चाहते थे।
रविंद्र के मन में एक दुविधा थी। क्या उसे गाँव के लोगों की जान बचानी चाहिए, या ठाकुर सिंह के परिवार के सदियों पुराने रहस्य को बरकरार रखना चाहिए? समय तेजी से बीत रहा था। हर बीतते पल के साथ, गाँव में और लोग बीमार पड़ रहे थे।
उसने फैसला कर लिया। वह चुप नहीं रहेगा।
उस रात, रविंद्र ने चुपके से कालभैरव के मंदिर में प्रवेश किया। मंदिर की गहरी शांति में, उसे एक गुप्त दरवाजा मिला। दरवाजे के पीछे, एक अंधेरी सुरंग थी।
सुरंग के अंत में, उसे एक कुआँ मिला। कुएँ का पानी काला और दुर्गंधपूर्ण था। रविंद्र समझ गया। गाँव की बीमारी का स्रोत यही था। ठाकुर सिंह ने जानबूझकर कुएँ के पानी को दूषित किया था, ताकि मंदिर के रहस्य को छुपाया जा सके।
लेकिन क्यों? रहस्य क्या था?
अचानक, उसने ठाकुर सिंह को अपनी ओर आते देखा। ठाकुर सिंह के हाथ में एक तलवार थी, और उसकी आँखों में हत्या का इरादा।
"तुमने यह नहीं करना चाहिए था, रविंद्र।" ठाकुर सिंह ने कहा। "अब तुम्हें इसकी कीमत चुकानी होगी।"
रविंद्र ने भागने की कोशिश की, लेकिन ठाकुर सिंह ने उसे पकड़ लिया। तलवार चमकी, और रविंद्र को दर्द का एक तीव्र एहसास हुआ।
लेकिन रविंद्र ने हार नहीं मानी। उसने ठाकुर सिंह पर हमला किया, और दोनों अंधेरी सुरंग में लड़ते रहे। आखिरकार, रविंद्र ने ठाकुर सिंह को कुएँ में धकेल दिया।
ठाकुर सिंह की चीखें अंधेरे में गूंज उठीं, फिर खामोश हो गईं।
रविंद्र, बुरी तरह से घायल, गाँव वापस लौटा। उसने लोगों को कुएँ के बारे में बताया, और उन्हें पानी का उपयोग करने से मना कर दिया।
गाँव के लोग चकित थे, लेकिन उन्होंने रविंद्र की बात मानी। जल्द ही, बीमारी फैलना बंद हो गई।
रविंद्र, कमजोर और थका हुआ, अपनी डिस्पेंसरी में गिर गया। उसने गाँव को बचाया था, लेकिन उसे अपनी जान की कीमत चुकानी पड़ी थी।
अगली सुबह, गाँव के लोग रविंद्र को जगाने आए, लेकिन वह अब नहीं रहा। वह कालभैरव की छाया में हमेशा के लिए सो गया था। लेकिन उसकी बहादुरी और बलिदान को गाँव कभी नहीं भूलेगा।
About This Story
Genres: Drama
Description: A village doctor discovers a hidden epidemic, forcing him to choose between saving his community and betraying an ancient secret.