पुस्तकालय प्रेम और एक गुप्त शत्रु
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लाइब्रेरी, मानो सदियों की धूल अपने अंदर समेटे हुए थी। किताबों की गंध, थोड़ी मिट्टी और थोड़ी पुरानी यादों जैसी, हवा में तैर रही थी। रिया, जो हमेशा से किताबों की दीवानी थी, इस जगह को अपना दूसरा घर मानती थी। लेकिन आज, उसकी नजरें किताबों पर नहीं, बल्कि लाइब्रेरी के नए सहायक, अर्जुन पर टिकी थीं। अर्जुन, लंबा, सांवला, और थोड़ा सा अनाड़ी, रिया के बिल्कुल विपरीत था। रिया, हमेशा सलीके से रहने वाली, आत्मविश्वास से भरी हुई, और अर्जुन, हमेशा उलझा हुआ, थोड़ा शर्मीला।
उनका मिलना एक दुर्घटना थी। रिया एक ऊँची शेल्फ से किताब निकालने की कोशिश कर रही थी, और अर्जुन, अपनी अनाड़ीपन में, उसी शेल्फ से टकरा गया। किताबें गिरीं, रिया गिरी, और अर्जुन, उसे बचाने की कोशिश में, उस पर गिर गया।
"ओह! माफ़ कीजिए!" अर्जुन हड़बड़ाते हुए बोला, उसका चेहरा शर्म से लाल हो गया।
रिया हंसी, "कोई बात नहीं। मैं ठीक हूँ।" उसकी हंसी सुनकर अर्जुन थोड़ा सहज हुआ।
और यहीं से उनकी कहानी शुरू हुई। वे हर रोज लाइब्रेरी में मिलते, किताबों पर बहस करते, एक-दूसरे को छेड़ते, और धीरे-धीरे, एक-दूसरे के प्यार में पड़ गए। रिया को अर्जुन की सादगी पसंद थी, और अर्जुन को रिया का आत्मविश्वास। लेकिन उनका प्यार, एक वर्जित प्यार था। रिया, लाइब्रेरी के मालिक, मिस्टर खन्ना की बेटी थी, और मिस्टर खन्ना, अर्जुन को अपनी बेटी के लायक नहीं मानते थे।
एक दिन, रिया ने अर्जुन से कहा, "अर्जुन, पापा को हमारे बारे में पता चल गया है। वे बहुत गुस्सा हैं।" रिया की आंखों में आंसू थे।
अर्जुन ने रिया का हाथ थामा, "मुझे पता था रिया। मुझे पता था कि ये आसान नहीं होगा। पर मैं तुम्हें छोड़ने वाला नहीं हूँ।"
लेकिन, उनकी मुश्किलें यहीं खत्म नहीं हुईं। लाइब्रेरी में अजीब चीजें होने लगीं। किताबें गायब होने लगीं, शेल्फ गिरने लगीं, और रिया को लगने लगा कि कोई उन्हें देख रहा है। अर्जुन को शक हुआ कि कोई उनकी प्रेम कहानी को बर्बाद करने की कोशिश कर रहा है।
एक रात, रिया और अर्जुन लाइब्रेरी में छुपे थे, यह पता लगाने के लिए कि कौन उन्हें परेशान कर रहा है। अचानक, उन्होंने मिस्टर खन्ना को एक किताब में से कुछ पन्ने निकालते हुए देखा।
"पापा? आप ये क्या कर रहे हैं?" रिया ने हैरान होकर पूछा।
मिस्टर खन्ना ने पलटकर देखा, और उनके चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान थी। "रिया, तुम यहाँ क्या कर रही हो? और अर्जुन?" उन्होंने अर्जुन को गुस्से से देखा। "मैं तुम्हें पहले ही कह चुका हूँ कि तुम मेरी बेटी के लायक नहीं हो।"
"पापा, ये सब क्या है? आप किताबों को क्यों बर्बाद कर रहे हैं?"
"ये किताबें नहीं, रिया। ये तुम्हारी और अर्जुन की प्रेम कहानी हैं। और मैं इस कहानी को कभी पूरा नहीं होने दूंगा।" मिस्टर खन्ना ने जेब से एक लाइटर निकाला। "मैं इस लाइब्रेरी को, और तुम्हारी इस प्रेम कहानी को, आग लगा दूंगा।"
अर्जुन ने तुरंत मिस्टर खन्ना पर झपट्टा मारा और लाइटर छीन लिया। रिया ने पुलिस को फोन किया। मिस्टर खन्ना को गिरफ्तार कर लिया गया।
बाद में, रिया और अर्जुन ने मिलकर लाइब्रेरी को फिर से बनाया। और, मिस्टर खन्ना के जेल जाने के बाद, रिया और अर्जुन ने शादी कर ली। उनकी प्रेम कहानी, जो धूल भरी लाइब्रेरी में शुरू हुई थी, आखिरकार एक खुशहाल अंत तक पहुंची। उनका प्यार, सभी बाधाओं को पार कर गया, और साबित कर दिया कि सच्चा प्यार हमेशा जीतता है, भले ही एक गुप्त दुश्मन उसे बर्बाद करने पर तुला हो।
उनका मिलना एक दुर्घटना थी। रिया एक ऊँची शेल्फ से किताब निकालने की कोशिश कर रही थी, और अर्जुन, अपनी अनाड़ीपन में, उसी शेल्फ से टकरा गया। किताबें गिरीं, रिया गिरी, और अर्जुन, उसे बचाने की कोशिश में, उस पर गिर गया।
"ओह! माफ़ कीजिए!" अर्जुन हड़बड़ाते हुए बोला, उसका चेहरा शर्म से लाल हो गया।
रिया हंसी, "कोई बात नहीं। मैं ठीक हूँ।" उसकी हंसी सुनकर अर्जुन थोड़ा सहज हुआ।
और यहीं से उनकी कहानी शुरू हुई। वे हर रोज लाइब्रेरी में मिलते, किताबों पर बहस करते, एक-दूसरे को छेड़ते, और धीरे-धीरे, एक-दूसरे के प्यार में पड़ गए। रिया को अर्जुन की सादगी पसंद थी, और अर्जुन को रिया का आत्मविश्वास। लेकिन उनका प्यार, एक वर्जित प्यार था। रिया, लाइब्रेरी के मालिक, मिस्टर खन्ना की बेटी थी, और मिस्टर खन्ना, अर्जुन को अपनी बेटी के लायक नहीं मानते थे।
एक दिन, रिया ने अर्जुन से कहा, "अर्जुन, पापा को हमारे बारे में पता चल गया है। वे बहुत गुस्सा हैं।" रिया की आंखों में आंसू थे।
अर्जुन ने रिया का हाथ थामा, "मुझे पता था रिया। मुझे पता था कि ये आसान नहीं होगा। पर मैं तुम्हें छोड़ने वाला नहीं हूँ।"
लेकिन, उनकी मुश्किलें यहीं खत्म नहीं हुईं। लाइब्रेरी में अजीब चीजें होने लगीं। किताबें गायब होने लगीं, शेल्फ गिरने लगीं, और रिया को लगने लगा कि कोई उन्हें देख रहा है। अर्जुन को शक हुआ कि कोई उनकी प्रेम कहानी को बर्बाद करने की कोशिश कर रहा है।
एक रात, रिया और अर्जुन लाइब्रेरी में छुपे थे, यह पता लगाने के लिए कि कौन उन्हें परेशान कर रहा है। अचानक, उन्होंने मिस्टर खन्ना को एक किताब में से कुछ पन्ने निकालते हुए देखा।
"पापा? आप ये क्या कर रहे हैं?" रिया ने हैरान होकर पूछा।
मिस्टर खन्ना ने पलटकर देखा, और उनके चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान थी। "रिया, तुम यहाँ क्या कर रही हो? और अर्जुन?" उन्होंने अर्जुन को गुस्से से देखा। "मैं तुम्हें पहले ही कह चुका हूँ कि तुम मेरी बेटी के लायक नहीं हो।"
"पापा, ये सब क्या है? आप किताबों को क्यों बर्बाद कर रहे हैं?"
"ये किताबें नहीं, रिया। ये तुम्हारी और अर्जुन की प्रेम कहानी हैं। और मैं इस कहानी को कभी पूरा नहीं होने दूंगा।" मिस्टर खन्ना ने जेब से एक लाइटर निकाला। "मैं इस लाइब्रेरी को, और तुम्हारी इस प्रेम कहानी को, आग लगा दूंगा।"
अर्जुन ने तुरंत मिस्टर खन्ना पर झपट्टा मारा और लाइटर छीन लिया। रिया ने पुलिस को फोन किया। मिस्टर खन्ना को गिरफ्तार कर लिया गया।
बाद में, रिया और अर्जुन ने मिलकर लाइब्रेरी को फिर से बनाया। और, मिस्टर खन्ना के जेल जाने के बाद, रिया और अर्जुन ने शादी कर ली। उनकी प्रेम कहानी, जो धूल भरी लाइब्रेरी में शुरू हुई थी, आखिरकार एक खुशहाल अंत तक पहुंची। उनका प्यार, सभी बाधाओं को पार कर गया, और साबित कर दिया कि सच्चा प्यार हमेशा जीतता है, भले ही एक गुप्त दुश्मन उसे बर्बाद करने पर तुला हो।
About This Story
Genres: Romance
Description: एक धूल भरी पुरानी लाइब्रेरी में, दो विपरीत स्वभाव के लोगों के बीच एक वर्जित प्रेम पनपता है, लेकिन उनके बीच एक गुप्त दुश्मन उनके रिश्ते को बर्बाद करने पर तुला हुआ है।