चाय और कोड
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मुंबई की भागदौड़ भरी ज़िन्दगी में, जहाँ हर कोई वक़्त के साथ दौड़ रहा था, अवनि एक शांत झील की तरह थी। वो, एक चायवाली। उसकी 'अवनि चाय' की टपरी, अंधेरी स्टेशन के बाहर, एक ऐसी जगह थी जहाँ लोग, कुछ पल के लिए, सांस ले पाते थे। और मैं? मैं रोहन, एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर, जो हर वक़्त कोड और डेडलाइन के बीच उलझा रहता था।
अवनि और मैं, बिलकुल विपरीत थे। मैं, सुबह नौ बजे से रात नौ बजे तक, कंप्यूटर स्क्रीन के सामने बैठा रहता था, जबकि अवनि, सुबह पांच बजे उठकर, ताज़ी चाय बनाती थी। मैं, हर चीज़ को लॉजिक और डेटा से देखता था, और वो, हर चीज़ में प्यार और अपनापन ढूंढती थी।
हमारी मुलाक़ात, एक दुर्घटना थी। मेरी लैपटॉप बैग खुली रह गयी थी, और मेरा कीमती लैपटॉप, अवनि की चाय की टपरी के सामने गिर गया। अवनि ने उसे उठाया, और मेरी जान में जान आई। फिर, वो बोली, "थोड़ी चाय पी लो, साहब। दिमाग ठंडा हो जाएगा।"
उस दिन से, मैं हर रोज़ अवनि की टपरी पर जाने लगा। उसकी चाय बहुत स्वादिष्ट थी, लेकिन शायद, मुझे उसकी बातें सुनने में ज़्यादा मज़ा आता था। वो, दुनिया के बारे में, लोगों के बारे में, और ज़िंदगी के बारे में, बहुत ही सरल और सच्ची बातें करती थी।
एक दिन, अवनि ने मुझसे कहा, "रोहन, तुम इतने उदास क्यों रहते हो?"
मैंने कहा, "मैं अपने काम से खुश नहीं हूँ। मुझे लगता है कि मैं कुछ और करना चाहता हूँ।"
उसने कहा, "तो करो ना! ज़िंदगी एक ही बार मिलती है।"
अवनि की बातों ने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया। मैं हमेशा से एक लेखक बनना चाहता था, लेकिन डरता था। डरता था कि मैं असफल हो जाऊंगा, डरता था कि लोग क्या कहेंगे।
धीरे-धीरे, अवनि और मैं प्यार में पड़ गए। यह एक बहुत ही अजीबोगरीब रिश्ता था, पर बहुत खूबसूरत भी। हम दोनों, एक-दूसरे से बहुत अलग थे, पर शायद, यही बात हमें एक-दूसरे के करीब लाती थी।
एक दिन, मुझे एक बड़ी कंपनी से नौकरी का ऑफर मिला। यह एक बहुत ही अच्छा मौका था, और मेरे करियर के लिए बहुत महत्वपूर्ण भी। लेकिन, इस नौकरी का मतलब था कि मुझे मुंबई छोड़कर, बैंगलोर जाना पड़ेगा।
मैंने अवनि को बताया। वो चुप रही, उसकी आँखों में उदासी थी।
"क्या करोगी तुम?" मैंने पूछा।
"मैं? मैं तो यहीं रहूंगी। मेरी चाय की टपरी यहीं है।" उसने कहा।
यह एक बहुत ही मुश्किल फैसला था। क्या मैं अपने करियर को चुनूं, या अपने प्यार को? क्या मैं अपनी सपनों को पूरा करूँ, या अवनि के साथ रहूँ?
मैंने कुछ दिन सोचने के लिए मांगे। मैंने अपने दोस्तों से, अपने परिवार से, और अपने दिल से बात की। अंत में, मैंने फैसला किया।
मैं अवनि के पास गया, और उसका हाथ पकड़ा।
"मैं यहीं रहूंगा," मैंने कहा। "मैं तुम्हारे साथ रहना चाहता हूँ।"
अवनि की आँखों में आंसू थे, लेकिन वो मुस्कुरा रही थी।
मैंने उस बड़ी कंपनी को मना कर दिया। मैंने अपनी नौकरी छोड़ दी, और एक फ्रीलांस राइटर बन गया। यह एक मुश्किल फैसला था, पर मुझे पता था कि मैंने सही फैसला किया है।
अब, मैं सुबह अवनि की चाय की टपरी पर चाय पीता हूँ, और फिर अपने लिखने के काम पर लग जाता हूँ। मेरी ज़िन्दगी आसान नहीं है, पर खुशहाल है। क्योंकि, मेरे पास अवनि है, और अवनि, मेरी चाय और मेरा कोड दोनों है। और शायद, यही है असली ख़ुशी, है न?
अवनि और मैं, बिलकुल विपरीत थे। मैं, सुबह नौ बजे से रात नौ बजे तक, कंप्यूटर स्क्रीन के सामने बैठा रहता था, जबकि अवनि, सुबह पांच बजे उठकर, ताज़ी चाय बनाती थी। मैं, हर चीज़ को लॉजिक और डेटा से देखता था, और वो, हर चीज़ में प्यार और अपनापन ढूंढती थी।
हमारी मुलाक़ात, एक दुर्घटना थी। मेरी लैपटॉप बैग खुली रह गयी थी, और मेरा कीमती लैपटॉप, अवनि की चाय की टपरी के सामने गिर गया। अवनि ने उसे उठाया, और मेरी जान में जान आई। फिर, वो बोली, "थोड़ी चाय पी लो, साहब। दिमाग ठंडा हो जाएगा।"
उस दिन से, मैं हर रोज़ अवनि की टपरी पर जाने लगा। उसकी चाय बहुत स्वादिष्ट थी, लेकिन शायद, मुझे उसकी बातें सुनने में ज़्यादा मज़ा आता था। वो, दुनिया के बारे में, लोगों के बारे में, और ज़िंदगी के बारे में, बहुत ही सरल और सच्ची बातें करती थी।
एक दिन, अवनि ने मुझसे कहा, "रोहन, तुम इतने उदास क्यों रहते हो?"
मैंने कहा, "मैं अपने काम से खुश नहीं हूँ। मुझे लगता है कि मैं कुछ और करना चाहता हूँ।"
उसने कहा, "तो करो ना! ज़िंदगी एक ही बार मिलती है।"
अवनि की बातों ने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया। मैं हमेशा से एक लेखक बनना चाहता था, लेकिन डरता था। डरता था कि मैं असफल हो जाऊंगा, डरता था कि लोग क्या कहेंगे।
धीरे-धीरे, अवनि और मैं प्यार में पड़ गए। यह एक बहुत ही अजीबोगरीब रिश्ता था, पर बहुत खूबसूरत भी। हम दोनों, एक-दूसरे से बहुत अलग थे, पर शायद, यही बात हमें एक-दूसरे के करीब लाती थी।
एक दिन, मुझे एक बड़ी कंपनी से नौकरी का ऑफर मिला। यह एक बहुत ही अच्छा मौका था, और मेरे करियर के लिए बहुत महत्वपूर्ण भी। लेकिन, इस नौकरी का मतलब था कि मुझे मुंबई छोड़कर, बैंगलोर जाना पड़ेगा।
मैंने अवनि को बताया। वो चुप रही, उसकी आँखों में उदासी थी।
"क्या करोगी तुम?" मैंने पूछा।
"मैं? मैं तो यहीं रहूंगी। मेरी चाय की टपरी यहीं है।" उसने कहा।
यह एक बहुत ही मुश्किल फैसला था। क्या मैं अपने करियर को चुनूं, या अपने प्यार को? क्या मैं अपनी सपनों को पूरा करूँ, या अवनि के साथ रहूँ?
मैंने कुछ दिन सोचने के लिए मांगे। मैंने अपने दोस्तों से, अपने परिवार से, और अपने दिल से बात की। अंत में, मैंने फैसला किया।
मैं अवनि के पास गया, और उसका हाथ पकड़ा।
"मैं यहीं रहूंगा," मैंने कहा। "मैं तुम्हारे साथ रहना चाहता हूँ।"
अवनि की आँखों में आंसू थे, लेकिन वो मुस्कुरा रही थी।
मैंने उस बड़ी कंपनी को मना कर दिया। मैंने अपनी नौकरी छोड़ दी, और एक फ्रीलांस राइटर बन गया। यह एक मुश्किल फैसला था, पर मुझे पता था कि मैंने सही फैसला किया है।
अब, मैं सुबह अवनि की चाय की टपरी पर चाय पीता हूँ, और फिर अपने लिखने के काम पर लग जाता हूँ। मेरी ज़िन्दगी आसान नहीं है, पर खुशहाल है। क्योंकि, मेरे पास अवनि है, और अवनि, मेरी चाय और मेरा कोड दोनों है। और शायद, यही है असली ख़ुशी, है न?
About This Story
Genres: Romance
Description: A software engineer finds unexpected romance with a tea stall owner, but their contrasting worlds present a challenging decision.