बारिश, विरासत और माँ

By Amit Kumar Pawar | 2026-02-25 | 1 min read

Story Content

गाँव हरा-भरा, राधा माँ, अर्जुन जान।

काले बादल, बुजुर्गों की चेतावनी, संकट का संकेत।

बारिश भयंकर, नदी उफान पर, गाँव खतरे में।

पुश्तैनी घर कमजोर, दीवारों में दरारें, डर गहरा।

अर्जुन फंसा, घर ढहा, राधा दौड़ी।

बचाव मुश्किल, बारिश तेज, घर गिरने का डर।

घर या बेटा? चुनाव कठिन, दिल में द्वंद्व।

गाँव डूबा, लोग भागे, अफरा-तफरी का माहौल।

मदद की गुहार, कोई नहीं आया, राधा अकेली।

अर्जुन बचा, घर छूटा, फैसला अटल।

घर गिरा, पानी में समाया, यादें रह गईं।

सुरक्षित स्थान, गाँव वाले साथ, उम्मीद की किरण।

पुनर्निर्माण, नई शुरुआत, विरासत जिंदा।

माँ की कहानी, बेटे का भविष्य, प्यार हमेशा।

विरासत दिलों में बसती है, घरों में नहीं।

About This Story

Genres: Poetry

Description: एक माँ का अटूट प्रेम और विरासत की रक्षा की कहानी, जो एक विनाशकारी बाढ़ के बीच अपने बेटे को बचाने के लिए संघर्ष करती है।