सिर्फ़ लहरें ही गवाह थीं (Sirf Lehre hi Gawah Thiin – Only the Waves Were Witness)

By Amit Kumar Pawar | 2026-01-25 | 2 min read

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समुद्र के किनारे बसे उस कैफ़े में, जहाँ नमक हवा में घुला रहता था और लहरों की आवाज़ हर बात को डुबो देने को आतुर रहती थी, मैं अक्सर अकेला बैठता था। मैं, विवान, एक आर्किटेक्ट, जो अपनी असफलताओं की छाया में जी रहा था। मेरे डिज़ाइन कभी भी समाज के मानदंडों पर खरे नहीं उतरे, और मेरे परिवार की उम्मीदें, जो मुझसे चिपकी हुई थीं, मुझे और भी बोझिल कर देती थीं।

एक शाम, जब सूरज धीरे-धीरे समुद्र में समा रहा था, मैंने उसे देखा। आयरा, एक कलाकार, जिसके बाल हवा में लहरा रहे थे और आँखों में एक अजीब सी चमक थी। वह रंगों की भाषा बोलती थी, जबकि मैं रेखाओं और कोणों में उलझा हुआ था। वह मुक्त थी, मैं बंधा हुआ।

"क्या मैं यहाँ बैठ सकती हूँ?" उसने पूछा, उसकी आवाज़ समुद्री हवा की तरह ताज़ी थी।

मैंने सिर हिला दिया। "हाँ, ज़रूर।"

हमारी बातचीत धीरे-धीरे शुरू हुई। मैंने उसे अपनी असफलताओं के बारे में बताया, अपने सपनों के बारे में जो कभी पूरे नहीं हो सके। उसने मुझे अपनी कला के बारे में बताया, उन भावनाओं के बारे में जो वह कैनवास पर उतारती थी। आयरा मानती थी कि 'ख़ूबसूरती खामियों में है' और 'कला स्वतंत्रता है'।

दिन बीतते गए और हम कैफ़े में मिलने लगे। वह मेरे लिए एक प्रेरणा बन गई थी, एक ऐसा प्रकाश जो मेरी ज़िंदगी के अंधेरे को कम कर रहा था। मैं उसके साथ खुश था, एक ऐसी ख़ुशी जो मैंने पहले कभी महसूस नहीं की थी।

फिर मैंने अपने परिवार को आयरा के बारे में बताया। उनकी प्रतिक्रिया वैसी ही थी जिसकी मुझे उम्मीद थी - निराशा और अस्वीकृति। वे एक 'कलाकार' को अपने परिवार का हिस्सा नहीं मान सकते थे। उनके लिए, वह मेरी 'छवि' के ख़िलाफ़ थी।

"विवान, तुम एक सफल आर्किटेक्ट हो। तुम्हें एक ऐसी लड़की से शादी करनी चाहिए जो तुम्हारे स्टेटस के लायक हो।" मेरी माँ ने कहा।

"लेकिन माँ, मैं आयरा से प्यार करता हूँ," मैंने कहा।

"प्यार एक क्षणिक भावना है, विवान। परिवार और समाज ज़्यादा महत्वपूर्ण हैं।" मेरे पिता ने कहा।

मुझे समझ आ गया कि मैं एक चौराहे पर खड़ा हूँ। एक तरफ मेरा परिवार था, मेरी ज़िम्मेदारी, और दूसरी तरफ आयरा, मेरी ख़ुशी, मेरी आज़ादी। मैंने आयरा को सब कुछ बता दिया।

उसने मुझे देखा, उसकी आँखों में आँसू थे। "मुझे पता था कि यह आसान नहीं होगा," उसने कहा। "लेकिन मैंने सोचा था कि हमारा प्यार इन सब से ज़्यादा मज़बूत होगा।"

"यह मज़बूत है," मैंने कहा। "लेकिन मैं अपने परिवार को नहीं छोड़ सकता।"

उसने कुछ नहीं कहा। वह उठी और कैफ़े से बाहर चली गई, समुद्र की ओर। मैंने उसे जाते हुए देखा, और मुझे लगा जैसे मेरी ज़िंदगी का एक हिस्सा मुझसे दूर जा रहा है।

मैंने परिवार के लिए आयरा को छोड़ दिया। मैंने वो किया जो 'सही' था, वो नहीं जो मैं चाहता था। सालों बाद, मैं आज भी उसी कैफ़े में बैठता हूँ, अकेला। लहरें अब भी वैसी ही हैं, हवा अब भी नमकीन है, लेकिन आयरा नहीं है। सिर्फ़ लहरें ही गवाह थीं, उस प्यार की, उस आज़ादी की, जिसे मैंने खो दिया। शायद, कभी-कभी, समाज के मानदंडों के आगे झुक जाना सबसे बड़ी हार होती है।

About This Story

Genres: Romance

Description: An introvert architect, haunted by past failures, finds an unlikely connection with a free-spirited artist in a seaside cafe, only to face the disapproval of his traditional family.