क्रिसमस का क्रायो-किस

By Amit Kumar Pawar | 2026-02-01 | 2 min read

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क्रिसमस की पूर्व संध्या थी, और डॉ. राधिका वर्मा, जो एक जीनियस वैज्ञानिक होने के साथ-साथ थोड़ी-सी अस्त-व्यस्त भी थीं, हमेशा की तरह अपनी प्रयोगशाला में डूबी हुई थीं। बाहर बर्फ गिर रही थी, लेकिन प्रयोगशाला के अंदर, तापमान माइनस दो सौ डिग्री सेल्सियस से भी कम था। राधिका क्रायो-प्रिजर्वेशन पर काम कर रही थी, और आज का दिन विशेष रूप से महत्वपूर्ण था।

उसके बगल में, डॉ. अर्जुन मल्होत्रा, जो दिखने में जितने स्मार्ट थे उतने ही आकर्षक भी, एक नई क्रायो-प्रोटेक्टिव तकनीक का परीक्षण कर रहे थे। अर्जुन ने राधिका को कॉफी पीने के लिए बुलाया, “राधिका, क्या तुम ब्रेक लेना चाहोगी? मेरा मतलब है, सिवाय इसके कि तुम फ्रीज़िंग तापमान में पहले से ही हो!”

राधिका ने हँसते हुए कहा, “हाँ, ज़रूर। मुझे लगता है कि मेरे दिमाग को भी थोड़ा डिफ्रास्टिंग की ज़रूरत है।”

कॉफी मशीन के पास, अर्जुन ने गलती से एक छोटे से डिब्बे को गिरा दिया। डिब्बा खुला, और एक छोटी-सी जमे हुए छिपकली फर्श पर गिर गई। राधिका ने डर के मारे चीख मारी, “अर्जुन! यह क्या है? क्या तुम प्रयोगशाला को चिड़ियाघर बना रहे हो?”

अर्जुन ने घबराकर कहा, “यह… यह एक परीक्षण नमूना है! क्रायो-प्रिजर्वेशन के लिए। चिंता मत करो, यह जीवित नहीं है… शायद।”

उस दिन के बाद, राधिका को लगने लगा कि अर्जुन उसे अजीब तरह से देख रहा है। वह सोच रही थी कि क्या यह छिपकली वाली घटना से जुड़ा हुआ है। क्या उसे लगता है कि वह डरपोक है? क्या वह उसे अब एक वैज्ञानिक के रूप में गंभीरता से नहीं लेगा?

क्रिसमस की पार्टी में, प्रयोगशाला को रंगीन रोशनी और रिबन से सजाया गया था। राधिका कोने में खड़ी थी, अपने विचारों में खोई हुई। अर्जुन उसके पास आया, उसके हाथ में एक गिलास वाइन थी।

“राधिका,” उसने कहा, उसकी आवाज़ थोड़ी घबराई हुई थी, “मुझे तुमसे कुछ कहना है।”

राधिका का दिल तेज़ी से धड़कने लगा। क्या वह उसे उस छिपकली के बारे में डांटेगा? क्या वह उसे बताएगा कि वह एक अच्छी वैज्ञानिक नहीं है?

अर्जुन ने गहरी साँस ली और कहा, “मैं… मैं तुम्हें क्रिसमस पर… वह… वह जमे हुए छिपकली… मतलब… मैंने सोचा कि… तुम…”

राधिका की आँखों में आँसू आ गए। वह वास्तव में निराश है, उसने सोचा।

तभी, अर्जुन ने ऊपर देखा, और उसकी आँखें चौड़ी हो गईं। “मिस्लेटो!” उसने कहा, ऊपर की ओर इशारा करते हुए।

राधिका ने ऊपर देखा, और सचमुच, उनके ऊपर एक मिस्लेटो का गुच्छा लटका हुआ था। वह हँसी, और उसकी आँखों में आँसू गायब हो गए।

“तो,” उसने कहा, मुस्कुराते हुए, “क्या इसका मतलब है कि हमें अब किस करना चाहिए?”

अर्जुन ने राहत की साँस ली और मुस्कुराया। “मुझे लगता है कि नियम तो नियम होते हैं, चाहे हम एक क्रायोजेनिक प्रयोगशाला में हों या कहीं और।”

और उन्होंने किस किया। यह एक जमे हुए छिपकली के बारे में एक अजीब और भ्रमित बातचीत की शुरुआत थी, लेकिन यह एक नए रिश्ते की मीठी शुरुआत भी थी। उस क्रिसमस की रात, राधिका को एहसास हुआ कि सबसे अप्रत्याशित स्थानों पर भी, प्यार पनप सकता है - यहाँ तक कि एक क्रायोजेनिक प्रयोगशाला में भी। और शायद, बस शायद, जमे हुए छिपकली का भी इसमें थोड़ा हाथ था।

About This Story

Genres: Romance

Description: A holiday romance blossoms amidst the sterile environment of a high-tech cryogenics lab, complicated by a hilarious misunderstanding involving frozen specimens and mistletoe.