पहाड़ी गीत और रेशमी धागे

By Amit Kumar Pawar | 2026-01-27 | 3 min read

Story Content

गाँव छोटा था, पहाड़ियों की गोद में बसा, जहाँ समय धीमी गति से चलता था। नीला, जिसका नाम उसके माता-पिता ने नीले आकाश से प्रेरित होकर रखा था, गाँव की एकमात्र बुनकर थी। उसकी उंगलियाँ रेशम के धागों पर ऐसे नाचती थीं जैसे कोई कुशल नर्तक, और हर एक बुने हुए कपड़े में गाँव की कहानियाँ गूंजती थीं।

एक दिन, एक अजनबी गाँव में आया। उसका नाम अर्जुन था, और वह शहर से आया था, एक ऐसा शहर जो नीला के गाँव से बिल्कुल अलग था। अर्जुन, एक लेखक था, जो अपनी अगली कहानी के लिए प्रेरणा की तलाश में था। उसने गाँव की शांति और नीला की आँखों में छिपी गहराई को देखा, और तुरंत आकर्षित हो गया।

"नमस्ते," अर्जुन ने कहा, जब उसने नीला को नदी किनारे बैठे हुए देखा। "मैं अर्जुन हूँ।"

नीला ने चौंककर ऊपर देखा। उसकी आँखें बड़ी और जिज्ञासु थीं। "नमस्ते," उसने जवाब दिया, उसकी आवाज़ एक कोमल हवा की तरह थी। "मैं नीला हूँ।"

अर्जुन ने उसके पास बैठते हुए कहा, "तुम्हारी कला अद्भुत है। तुम्हारे हाथों में जादू है।"

नीला मुस्कुराई, एक सच्ची और दिल से निकलने वाली मुस्कान। "यह सिर्फ धागा है," उसने कहा, "और मेरी दादी की सिखाई हुई तकनीक।"

दिन हफ्तों में बदल गए, और अर्जुन और नीला ने एक साथ बहुत समय बिताया। वे पहाड़ियों पर घूमते, नदी किनारे बातें करते, और नीला अर्जुन को गाँव की कहानियाँ सुनाती। अर्जुन को नीला के दिल में एक गहरी समझदारी और दयालुता मिली, और नीला को अर्जुन में एक ऐसा साथी मिला जो उसे बिना किसी शर्त के समझता था।

लेकिन गाँव में उनकी बढ़ती दोस्ती को लेकर फुसफुसाहटें शुरू हो गईं। नीला गाँव की थी, और अर्जुन शहर का। गाँव के लोगों को लगता था कि वे दोनों एक साथ नहीं हो सकते। उनकी जातियाँ अलग थीं, उनकी पृष्ठभूमि अलग थी, और उनकी जिंदगी जीने के तरीके भी अलग थे।

एक शाम, नीला की माँ ने उसे बुलाया और कहा, "नीला, मुझे पता है कि तुम अर्जुन को पसंद करती हो। लेकिन वह हमारे गाँव का नहीं है। तुम्हें किसी ऐसे व्यक्ति से शादी करनी चाहिए जो हमारे जैसा हो।"

नीला का दिल टूट गया। वह अपनी माँ से प्यार करती थी, और वह जानती थी कि उसकी माँ सिर्फ उसकी भलाई चाहती है। लेकिन वह अर्जुन से भी प्यार करती थी, और वह उसके बिना अपनी जिंदगी की कल्पना नहीं कर सकती थी।

अर्जुन ने भी गाँव के लोगों की फुसफुसाहटें सुनी थीं। उसने नीला से कहा, "मुझे पता है कि यह आसान नहीं होगा। लेकिन मैं तुम्हारे लिए लड़ने को तैयार हूँ।"

नीला ने अर्जुन का हाथ थामा और कहा, "मैं भी लड़ने को तैयार हूँ।"

उन्होंने गाँव के लोगों को समझाने का फैसला किया। उन्होंने उन्हें बताया कि प्यार जाति या पृष्ठभूमि नहीं देखता, यह सिर्फ दिल देखता है। उन्होंने उन्हें बताया कि वे दोनों एक दूसरे को खुश करते हैं, और वे एक साथ एक बेहतर जिंदगी बना सकते हैं।

कुछ लोगों ने उनकी बात सुनी, लेकिन कुछ लोग अभी भी मानने को तैयार नहीं थे। गाँव के मुखिया ने कहा, "अगर तुम दोनों शादी करना चाहते हो, तो तुम्हें गाँव छोड़ना होगा।"

यह एक मुश्किल फैसला था। नीला अपने गाँव से प्यार करती थी, और वह इसे छोड़ना नहीं चाहती थी। लेकिन वह अर्जुन को भी नहीं छोड़ना चाहती थी।

आखिरकार, उन्होंने गाँव छोड़ने का फैसला किया। उन्होंने एक साथ एक नई जिंदगी शुरू करने का फैसला किया, जहाँ उन्हें प्यार करने और खुश रहने की आज़ादी होगी। जब वे गाँव से जा रहे थे, तो नीला ने पीछे मुड़कर देखा। उसे पता था कि वह गाँव को कभी नहीं भूलेगी, लेकिन उसे यह भी पता था कि वह सही फैसला ले रही है। अर्जुन ने उसका हाथ पकड़ा, और वे दोनों आगे बढ़ गए, एक नई शुरुआत की ओर, एक ऐसे भविष्य की ओर जहाँ उनका प्यार पहाड़ी गीतों की तरह गूंजेगा और रेशमी धागों की तरह जुड़ा रहेगा।

About This Story

Genres: Romance

Description: दूरदराज के एक शांत गाँव में, दो आत्माएँ मिलती हैं, उनके भाग्य सामाजिक अपेक्षाओं के ताने-बाने से बंधे हैं, फिर भी उनके दिल एक अटूट राग गाते हैं।