पहचान का इम्तिहान

By Amit Kumar Pawar | 2026-02-23 | 1 min read

Story Content

आधुनिक हवाई अड्डा: अर्जुन सूट में, विदेश से लौटा, फ़ोन में व्यस्त।

रमा, बूढ़ी माँ, हवाई अड्डे के बाहर बेताबी से इंतज़ार कर रही है।

अर्जुन माँ को अनदेखा कर टैक्सी ढूंढता है, रमा का दिल टूट जाता है।

रमा, कोने में बैठी, सोचती है: क्या अर्जुन इतना बदल गया है?

विक्रम, अमीर दोस्त, महंगी कार में अर्जुन को लेने आता है।

अर्जुन, विक्रम के आलीशान घर में, विदेश जैसा महसूस करता है।

व्यापार की बातें: अर्जुन भारत में निवेश की योजना बना रहा है।

रमा, छोटे से घर में, अर्जुन के लिए चिंतित है, फ़ोन बंद है।

पुरानी तस्वीरें: रमा को अर्जुन के बचपन की यादें आती हैं।

विक्रम पूछता है: क्या एयरपोर्ट पर वो बूढ़ी औरत तुम्हारी माँ थी?

अर्जुन झूठ बोलता है: मेरी माँ गाँव में रहती है।

पश्चाताप: अर्जुन को अपनी गलती का एहसास होता है, बेचैनी।

खोज: अर्जुन रमा को ढूंढने हवाई अड्डे वापस जाता है, निराशा।

मिलन: अर्जुन रमा को घर पर ढूंढता है, माफी मांगता है, प्रायश्चित।

अर्जुन समझता है: दौलत से ज्यादा माँ का प्यार महत्वपूर्ण है।

About This Story

Genres: Drama

Description: A son, blinded by ambition, fails to recognize his mother upon his return from abroad, leading to a poignant journey of regret, reconciliation, and rediscovering the true values of life.