रेत में दबी यादें (Ret Mein Dabi Yaadein)
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रेत में दबी यादें,
जैसे पाँव के निशान,
लहरों ने मिटा दिए,
पर दिल में रह गए निशान।
वो शामें नदी किनारे,
हाथों में हाथ डाले,
अनगिनत बातें,
जैसे सितारे आसमान में छाए।
याद है वो पहली मुलाकात,
बरसात की एक रात,
तुमने छाता दिया था,
और दिल मेरा धड़का था।
फिर वो हँसी, वो बातें,
वो साथ बिताई रातें,
सब कुछ तो था,
फिर क्यों हुआ ये सब?
एक तूफान आया,
सब कुछ बहा ले गया,
तुम दूर चले गए,
और मैं अकेली रह गई।
अब तो बस यादें हैं,
जो दिल को जलाती हैं,
जैसे आग धीरे-धीरे,
लकड़ी को खाती है।
वो तुम्हारी आवाज़,
कानों में गूंजती है,
जैसे कोई गीत अधूरा,
बार-बार दोहराता है।
मैंने कितनी कोशिश की,
तुम्हे भुलाने की,
पर हर कोशिश नाकाम रही,
जैसे रेत मुट्ठी में बांधने की।
अब तो आदत सी हो गई है,
अकेले रहने की,
तुम्हारी यादों के साथ,
जीने की।
कभी-कभी सोचती हूँ,
क्या तुम भी याद करते हो?
क्या तुम्हे भी वो दिन,
सताते हैं?
शायद नहीं,
तुम तो खुश हो,
अपनी नई दुनिया में,
मुझे छोड़कर।
पर मैं क्या करूँ,
मेरा तो सब कुछ तुम थे,
तुम्हारे बिना मैं,
जैसे एक खाली बर्तन।
ये दिल आज भी,
तुम्हारी राह देखता है,
जैसे कोई प्यासा पंछी,
बारिश का इंतजार करता है।
जानती हूँ ये मुमकिन नहीं,
फिर भी उम्मीद नहीं छोड़ती,
जैसे कोई दीया,
हवा में जलता रहता है।
रेत में दबी यादें,
कभी तो उभर आएंगी,
शायद किसी दिन,
हम फिर मिलेंगे।
तब क्या होगा,
ये मैं नहीं जानती,
पर इतना पता है,
ये दिल फिर धड़केगा।
वो पहली मुलाकात,
फिर से याद आएगी,
और हम,
फिर से खो जाएंगे।
रेत में दबी यादें,
ज़िंदगी भर रहेंगी,
तुम्हारी मोहब्बत की,
निशानी बन कर।
जैसे कोई तारा,
अंधेरी रात में,
चमकता रहता है,
हमेशा के लिए।
और मैं,
तुम्हारी यादों में,
जीती रहूंगी,
हमेशा।
ये दिल,
तुम्हारा ही रहेगा,
चाहे तुम आओ,
या ना आओ।
क्योंकि प्यार,
कभी मरता नहीं,
बस,
रेत में दब जाता है।
और एक दिन,
फिर से उभर आता है।
तुम्हारी याद में,
एक और दिन बीत गया,
और मैं,
फिर से अकेली रह गई।
लेकिन ये यादें,
मेरा सहारा हैं,
तुम्हारी मोहब्बत की,
अमर कहानी हैं।
जैसे पाँव के निशान,
लहरों ने मिटा दिए,
पर दिल में रह गए निशान।
वो शामें नदी किनारे,
हाथों में हाथ डाले,
अनगिनत बातें,
जैसे सितारे आसमान में छाए।
याद है वो पहली मुलाकात,
बरसात की एक रात,
तुमने छाता दिया था,
और दिल मेरा धड़का था।
फिर वो हँसी, वो बातें,
वो साथ बिताई रातें,
सब कुछ तो था,
फिर क्यों हुआ ये सब?
एक तूफान आया,
सब कुछ बहा ले गया,
तुम दूर चले गए,
और मैं अकेली रह गई।
अब तो बस यादें हैं,
जो दिल को जलाती हैं,
जैसे आग धीरे-धीरे,
लकड़ी को खाती है।
वो तुम्हारी आवाज़,
कानों में गूंजती है,
जैसे कोई गीत अधूरा,
बार-बार दोहराता है।
मैंने कितनी कोशिश की,
तुम्हे भुलाने की,
पर हर कोशिश नाकाम रही,
जैसे रेत मुट्ठी में बांधने की।
अब तो आदत सी हो गई है,
अकेले रहने की,
तुम्हारी यादों के साथ,
जीने की।
कभी-कभी सोचती हूँ,
क्या तुम भी याद करते हो?
क्या तुम्हे भी वो दिन,
सताते हैं?
शायद नहीं,
तुम तो खुश हो,
अपनी नई दुनिया में,
मुझे छोड़कर।
पर मैं क्या करूँ,
मेरा तो सब कुछ तुम थे,
तुम्हारे बिना मैं,
जैसे एक खाली बर्तन।
ये दिल आज भी,
तुम्हारी राह देखता है,
जैसे कोई प्यासा पंछी,
बारिश का इंतजार करता है।
जानती हूँ ये मुमकिन नहीं,
फिर भी उम्मीद नहीं छोड़ती,
जैसे कोई दीया,
हवा में जलता रहता है।
रेत में दबी यादें,
कभी तो उभर आएंगी,
शायद किसी दिन,
हम फिर मिलेंगे।
तब क्या होगा,
ये मैं नहीं जानती,
पर इतना पता है,
ये दिल फिर धड़केगा।
वो पहली मुलाकात,
फिर से याद आएगी,
और हम,
फिर से खो जाएंगे।
रेत में दबी यादें,
ज़िंदगी भर रहेंगी,
तुम्हारी मोहब्बत की,
निशानी बन कर।
जैसे कोई तारा,
अंधेरी रात में,
चमकता रहता है,
हमेशा के लिए।
और मैं,
तुम्हारी यादों में,
जीती रहूंगी,
हमेशा।
ये दिल,
तुम्हारा ही रहेगा,
चाहे तुम आओ,
या ना आओ।
क्योंकि प्यार,
कभी मरता नहीं,
बस,
रेत में दब जाता है।
और एक दिन,
फिर से उभर आता है।
तुम्हारी याद में,
एक और दिन बीत गया,
और मैं,
फिर से अकेली रह गई।
लेकिन ये यादें,
मेरा सहारा हैं,
तुम्हारी मोहब्बत की,
अमर कहानी हैं।
About This Story
Genres: Poetry
Description: A poem about the lingering memories of a lost love, like footprints buried in the sand, forever etched in the heart despite the passage of time.