समुंदर की स्याही

By Amit Kumar Pawar | 2026-02-08 | 2 min read

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समुंदर की स्याही से लिखी एक अधूरी कहानी, और मैं, उस कहानी का गुमशुदा पन्ना। मैं अक्सर इस कैफ़े में आती हूँ। 'सागरिका' – नाम में ही एक उदासी घुली है, जो मेरे अंदर के शोर को शांत करती है। खिड़की से दिखते अथाह सागर की तरह, मेरी ज़िंदगी भी किसी रहस्य से भरी है, जिसका अंत मुझे नहीं पता।

आज भी वैसी ही शांत दोपहर थी। सूरज की किरणें लहरों पर नाच रही थीं, और हवा में नमक की भीनी-भीनी खुशबू थी। मैंने अपनी कॉफ़ी का पहला घूँट लिया, तभी मेरी नज़र टेबल पर रखे एक पुराने लिफ़ाफ़े पर पड़ी। स्याही से कुछ लिखा था, पर आधा मिट चुका था। मुश्किल से 'मिलना...कल...सात...' पढ़ पाई।

"क्या देख रही हैं?" एक आवाज़ ने मुझे चौंका दिया। एक अजनबी, जिसकी आँखों में समंदर जैसी गहराई थी, मेरे सामने खड़ा था। "वो लिफ़ाफ़ा...वो मेरा है।"

मैंने लिफ़ाफ़ा उसे दे दिया। "माफ़ कीजिए। बस...थोड़ा अजीब लगा। अधूरा संदेश।"

उसने लिफ़ाफ़ा लिया, पर खोला नहीं। "कुछ कहानियाँ अधूरी ही अच्छी लगती हैं।" उसकी आवाज़ में एक दर्द था, जिसे मैं महसूस कर सकती थी।

"क्या मतलब है?" मैंने पूछा। उत्सुकता मुझ पर हावी हो रही थी।

उसने एक गहरी साँस ली। "ये एक पुरानी कहानी है। मेरी...और किसी और की।" फिर उसने बताया कि कैसे सालों पहले, उसने इसी कैफ़े में किसी का इंतज़ार किया था। सात बजे। पर वो कभी नहीं आई। और उस दिन के बाद, उसने उस रहस्य को कभी सुलझाने की कोशिश नहीं की।

"पर क्यों?" मैंने पूछा। "शायद वो मजबूर रही होगी। शायद वो आना चाहती थी।"

उसने उदास होकर मुस्कुराया। "शायद। पर अब बहुत देर हो चुकी है।" उसने अपनी घड़ी की तरफ देखा। "आज फिर सात बजने वाले हैं। और मैं, फिर उसी इंतज़ार में हूँ।"

मुझे अचानक एक डर लगा। एक अनजानी आशंका ने मुझे घेर लिया। "क्या आपको लगता है कि वो आज आएगी?"

"नहीं," उसने कहा। "पर मुझे ये जानना है कि क्यों नहीं आई।" उसने लिफ़ाफ़ा खोला। अंदर एक पुराना फ़ोटो था। एक लड़की का, जिसकी आँखों में वैसी ही गहराई थी, जैसी उसकी आँखों में थी।

"ये कौन है?" मैंने पूछा।

"वो, जो कभी मेरी थी।" उसने कहा। "उसने मुझे एक ख़त लिखा था, जिसमें उसने बताया था कि उसे मजबूरन शहर छोड़ना पड़ रहा है। जान का खतरा था। उसने मिलने के लिए यही जगह चुनी थी, पर वो कभी नहीं आ पाई। मुझे ये ख़त आज ही मिला। किसी ने गुमनाम भेजा है।"

मैंने फ़ोटो को ध्यान से देखा। लड़की की आँखों में एक डर था, पर एक उम्मीद भी थी। "हमें उसे ढूंढना होगा," मैंने कहा। "अभी भी वक़्त है।"

उसने मेरी तरफ देखा। उसकी आँखों में एक नई चमक थी। "तुम मेरी मदद करोगी?"

मैंने अपना हाथ आगे बढ़ाया। "हाँ। हम मिलकर इस अधूरी कहानी को पूरा करेंगे।" सात बजने में कुछ ही घंटे बचे थे। हमारे पास वक़्त कम था, और रास्ता अनजान। पर हम दोनों जानते थे कि हमें कोशिश करनी होगी। उस अधूरी कहानी को पूरा करने के लिए, उस खोई हुई उम्मीद को ढूंढने के लिए, और उस समुंदर की स्याही से लिखे दर्द को मिटाने के लिए। हमारी दौड़ वक़्त के खिलाफ शुरू हो चुकी थी।

About This Story

Genres: Romance

Description: In a quiet seaside cafe, a woman encounters a cryptic message and a stranger who may hold the key to unraveling a mystery before time runs out.