ख़ामोश पत्तों की चीख़ (Khamosh Patton Ki Cheekh - The Silent Scream of Leaves)
Story Content
पीली धूप, धुंध,
पुरानी यादें फिर ताज़ा,
दिल में टीस उठी।
सूखे पत्ते गिरे,
बचपन की हंसी गूंजी,
आँसू बन बरसे।
ठंडी हवा चली,
माँ की लोरी याद आई,
सुकून फिर खोया।
धुंधला सा रास्ता,
अकेलेपन का एहसास,
कदम डगमगाए।
पहली बर्फ गिरी,
शांत, सफेद चादर ओढ़ी,
दर्द कुछ कम हुआ।
कोहरे की चादर,
छुपाती है बीते लम्हे,
दिल फिर भी रोता।
जलती हुई आग,
पुरानी चिट्ठियाँ जलाईं,
धुआँ बन उड़ी याद।
लंबी रातें अब,
तन्हाई का गहरा सागर,
सपने अधूरे हैं।
गुमसुम सी सुबह,
चिड़ियों का शोर भी चुप है,
मन उदास मेरा।
बर्फ पिघल रही,
नई उम्मीद की किरण,
फिर भी डर लगता।
मिट्टी की खुशबू,
फिर से जीवन की आस,
दिल धड़कने लगा।
नंगे पेड़ खड़े,
बसंत का इंतजार है,
प्रकृति की माया।
कलियाँ खिलने लगीं,
रंगों से भरी दुनिया,
खुशी की आहट।
कोयल की कूक,
नई उमंगें, नई राहें,
दिल मुस्कुराया फिर।
पहली बारिश की,
बूंदें छूती धरती को,
प्रेम फिर जागा।
हरी भरी घास,
खुले आसमान की छाया,
जीवन का सार है।
तेज धूप खिली,
गर्मी की आहट आई,
दिन लंबे हुए।
नदी बहती है,
शांत, शीतल जलधारा,
मन शांत हुआ अब।
फूलों की महक,
भंवरे गुंजन करते हैं,
जीवन की धुन है।
पतझड़ फिर आएगा,
यह जीवन का चक्र है,
स्वीकार है मुझे।
हर मौसम नया,
एक नया अनुभव है,
खुशी और गम भी।
समय बहता है,
नदी की तरह निरंतर,
सीख है हर पल में।
शांत मन मेरा,
प्रकृति से जुड़ा हुआ,
जीवन का अर्थ है।
ये मौसम बदले,
यादें बनकर रह जाएँ,
दिल में हमेशा।
फिर से इंतज़ार,
अगले मौसम का होगा,
आशा की किरण है।
पीली पत्ती गिरी,
एक और साल बीत गया,
ज़िन्दगी का सच।
ठंडी हवा का,
झोंका ले गया सब कुछ,
फिर भी मैं खड़ा।
बर्फ की शांति में,
खोया हुआ हूँ मैं कहीं,
खुद को ढूँढता।
कोयल की कूक,
फिर से सुनाई दी मुझको,
नई सुबह आई।
पुरानी यादें फिर ताज़ा,
दिल में टीस उठी।
सूखे पत्ते गिरे,
बचपन की हंसी गूंजी,
आँसू बन बरसे।
ठंडी हवा चली,
माँ की लोरी याद आई,
सुकून फिर खोया।
धुंधला सा रास्ता,
अकेलेपन का एहसास,
कदम डगमगाए।
पहली बर्फ गिरी,
शांत, सफेद चादर ओढ़ी,
दर्द कुछ कम हुआ।
कोहरे की चादर,
छुपाती है बीते लम्हे,
दिल फिर भी रोता।
जलती हुई आग,
पुरानी चिट्ठियाँ जलाईं,
धुआँ बन उड़ी याद।
लंबी रातें अब,
तन्हाई का गहरा सागर,
सपने अधूरे हैं।
गुमसुम सी सुबह,
चिड़ियों का शोर भी चुप है,
मन उदास मेरा।
बर्फ पिघल रही,
नई उम्मीद की किरण,
फिर भी डर लगता।
मिट्टी की खुशबू,
फिर से जीवन की आस,
दिल धड़कने लगा।
नंगे पेड़ खड़े,
बसंत का इंतजार है,
प्रकृति की माया।
कलियाँ खिलने लगीं,
रंगों से भरी दुनिया,
खुशी की आहट।
कोयल की कूक,
नई उमंगें, नई राहें,
दिल मुस्कुराया फिर।
पहली बारिश की,
बूंदें छूती धरती को,
प्रेम फिर जागा।
हरी भरी घास,
खुले आसमान की छाया,
जीवन का सार है।
तेज धूप खिली,
गर्मी की आहट आई,
दिन लंबे हुए।
नदी बहती है,
शांत, शीतल जलधारा,
मन शांत हुआ अब।
फूलों की महक,
भंवरे गुंजन करते हैं,
जीवन की धुन है।
पतझड़ फिर आएगा,
यह जीवन का चक्र है,
स्वीकार है मुझे।
हर मौसम नया,
एक नया अनुभव है,
खुशी और गम भी।
समय बहता है,
नदी की तरह निरंतर,
सीख है हर पल में।
शांत मन मेरा,
प्रकृति से जुड़ा हुआ,
जीवन का अर्थ है।
ये मौसम बदले,
यादें बनकर रह जाएँ,
दिल में हमेशा।
फिर से इंतज़ार,
अगले मौसम का होगा,
आशा की किरण है।
पीली पत्ती गिरी,
एक और साल बीत गया,
ज़िन्दगी का सच।
ठंडी हवा का,
झोंका ले गया सब कुछ,
फिर भी मैं खड़ा।
बर्फ की शांति में,
खोया हुआ हूँ मैं कहीं,
खुद को ढूँढता।
कोयल की कूक,
फिर से सुनाई दी मुझको,
नई सुबह आई।
About This Story
Genres: Poetry
Description: A haiku series exploring the poignant emotions of seasonal change, reflecting on loss, memory, and the quiet beauty of impermanence through a personal lens.