रेत पर लिखी कहानी (Ret Par Likhi Kahani - A Story Written on Sand)
Story Content
वो रेत का महल था, हमने बनाया,
उम्मीदों की नींव पर, प्यार से सजाया।
हर ईंट पे नाम था, तेरा और मेरा,
एक साथ हँसने का, सपना सवेरा।
वो लहर आई और सब ले गयी,
निशान भी मिटा दिए, कसक दे गयी।
वो रेत का महल था, कितना नाज़ुक था,
हमारी कहानी का, बस एक अक्स था।
याद है वो शाम, जब पहली बार मिले थे,
अनजाने रास्तों पर, साथ चले थे।
तुम्हारी आँखों में, एक चमक थी नयी,
मेरी दुनिया जैसे, वहीं पे ठहरी थी।
फिर धीरे-धीरे, बातें कम होने लगीं,
अनकही दूरियां, बढ़ने लगीं।
वो प्यार की आग, जो जलती थी कभी,
अब राख बन के, उड़ने लगी सभी।
मैं अक्सर सोचता हूँ, कहाँ खो गया वो पल,
जब सब कुछ अपना था, साथ थे हर पल।
क्या गलती थी मेरी, या तेरी ही थी,
जो ये कहानी, अधूरी ही रह गयी।
अब अकेले बैठा हूँ, इस किनारे पर,
देखता हूँ लहरों को, आते जाते हर पल।
हर लहर में तेरा, अक्स दिखता है,
जैसे टूटा हुआ सपना, फिर से जुड़ता है।
पर ये तो बस, एक धोखा है मेरा,
लहरें तो चली जाती हैं, छोड़ जाती हैं अंधेरा।
वो रेत का महल था, फिर कभी न बनेगा,
दिल में जो दर्द है, कभी न थमेगा।
मैंने कोशिश की, तुम्हें भुलाने की,
पर हर कोशिश में, याद आई तेरी।
जैसे कोई पुराना गीत, बजता रहता है,
दिल के किसी कोने में, छुपता रहता है।
वो तेरी हंसी, वो तेरी बातें,
वो साथ बिताई, हर रातें।
सब कुछ याद है, जैसे कल की बात हो,
पर अब तो बस, एक खाली सी रात हो।
शायद यही है, प्यार की कहानी,
कभी खुशी, कभी गम की निशानी।
कुछ यादें हमेशा, साथ रहती हैं,
कुछ बातें अधूरी, रह ही जाती हैं।
अब तो बस यही दुआ है, मेरी,
खुश रहो तुम, जहाँ भी रहो तेरी।
भले ही मैं न रहूँ, तुम्हारी जिंदगी में,
पर मेरी यादें, साथ रहें हर घड़ी में।
रेत पर लिखी कहानी, मिट गयी है भले,
पर दिल में लिखी, मिटेगी न कभी ये।
ये प्यार की कहानी, अधूरी सही,
पर मेरी जिंदगी का, एक हिस्सा रही।
उम्मीदों की नींव पर, प्यार से सजाया।
हर ईंट पे नाम था, तेरा और मेरा,
एक साथ हँसने का, सपना सवेरा।
वो लहर आई और सब ले गयी,
निशान भी मिटा दिए, कसक दे गयी।
वो रेत का महल था, कितना नाज़ुक था,
हमारी कहानी का, बस एक अक्स था।
याद है वो शाम, जब पहली बार मिले थे,
अनजाने रास्तों पर, साथ चले थे।
तुम्हारी आँखों में, एक चमक थी नयी,
मेरी दुनिया जैसे, वहीं पे ठहरी थी।
फिर धीरे-धीरे, बातें कम होने लगीं,
अनकही दूरियां, बढ़ने लगीं।
वो प्यार की आग, जो जलती थी कभी,
अब राख बन के, उड़ने लगी सभी।
मैं अक्सर सोचता हूँ, कहाँ खो गया वो पल,
जब सब कुछ अपना था, साथ थे हर पल।
क्या गलती थी मेरी, या तेरी ही थी,
जो ये कहानी, अधूरी ही रह गयी।
अब अकेले बैठा हूँ, इस किनारे पर,
देखता हूँ लहरों को, आते जाते हर पल।
हर लहर में तेरा, अक्स दिखता है,
जैसे टूटा हुआ सपना, फिर से जुड़ता है।
पर ये तो बस, एक धोखा है मेरा,
लहरें तो चली जाती हैं, छोड़ जाती हैं अंधेरा।
वो रेत का महल था, फिर कभी न बनेगा,
दिल में जो दर्द है, कभी न थमेगा।
मैंने कोशिश की, तुम्हें भुलाने की,
पर हर कोशिश में, याद आई तेरी।
जैसे कोई पुराना गीत, बजता रहता है,
दिल के किसी कोने में, छुपता रहता है।
वो तेरी हंसी, वो तेरी बातें,
वो साथ बिताई, हर रातें।
सब कुछ याद है, जैसे कल की बात हो,
पर अब तो बस, एक खाली सी रात हो।
शायद यही है, प्यार की कहानी,
कभी खुशी, कभी गम की निशानी।
कुछ यादें हमेशा, साथ रहती हैं,
कुछ बातें अधूरी, रह ही जाती हैं।
अब तो बस यही दुआ है, मेरी,
खुश रहो तुम, जहाँ भी रहो तेरी।
भले ही मैं न रहूँ, तुम्हारी जिंदगी में,
पर मेरी यादें, साथ रहें हर घड़ी में।
रेत पर लिखी कहानी, मिट गयी है भले,
पर दिल में लिखी, मिटेगी न कभी ये।
ये प्यार की कहानी, अधूरी सही,
पर मेरी जिंदगी का, एक हिस्सा रही।
About This Story
Genres: Poetry
Description: A poem about the ephemeral nature of love, how deeply it can be felt, and the pain of watching it fade away like a story washed away by the tide.