वह तपस्वी है!

By Amit Kumar Pawar | 2026-01-07 | 1 min read

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उसकी देह पर सत्तर से अधिक बसंत बीत चुके थे, पर मुख की कांति किसी ओजस्वी ऋषि जैसी थी। सफ़ेद दाढ़ी की शुभ्रता और माथे पर खिंची अनुभव की लकीरें उसके त्याग और अनुशासन की गवाही देती थीं। जब वह केसरिया साफे और कसी हुई वास्कट (Modi Jacket) में सजकर निकलता, तो लगता मानो आधुनिकता और प्राचीन परंपरा का अनूठा संगम साकार हो उठा हो।
​उसकी चाल में एक विशेष ठहराव था, पर नज़रों में गरुड़ जैसी पैनी दृष्टि। वह भीड़ के शोर के बीच भी अपनी आँखें बंद कर गहरे मौन में उतर सकता था, और जब बोलता, तो उसकी वाणी की गूँज हिमालय की कंदराओं से लेकर सागर के तट तक सुनाई देती। उसका हाथ उठाना मात्र जनसमूह के लिए एक संकेत था—एक ऐसा संकेत, जो लाखों के हृदय में उल्लास भर देता था। अपनी बाहें फैलाकर जब वह 'भाइयों-बहनों' का उद्घोष करता, तो सारा वातावरण एक चुंबकीय आकर्षण से भर उठता था।
​वह कभी चाय के धुएँ में भविष्य ढूँढता था, कभी हिमालय की गुफाओं में शांति। आज वह सत्ता के शिखर पर था, पर उसके भीतर का वह अनासक्त सन्यासी आज भी उतना ही सजग था। ऊँचे संकल्पों का भार उठाए, वह बिना थके, बिना रुके अपने पथ पर बढ़ता ही जाता था।
​वह नेता नहीं, वह एक 'तपस्वी' है!

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Genres: Mystery, Fantasy, Horror

Description: story as a influence