अंतिम मुलाकात: एक झूठ की कीमत

By Amit Kumar Pawar | 2026-02-20 | 1 min read

Story Content

युद्ध की छाया में:

धूल और राख से भरी हवा,
टूटे हुए सपनों का मलबा।
अस्पताल खंडहर, एक चीख मौन,
राधिका, नर्स, खोज में मग्न।

विक्रम, उसका प्यार, सैनिक वीर,
वादा था, लौटेंगे ज़रूर।
पर अब, हर पत्थर एक प्रश्न,
क्या वो साँस ले रहा है, या है अंत?

यादों का झोंका:

बाग में खिलखिलाती हँसी,
वर्दी में विक्रम, आँखों में खुशी।
'मैं लौटूंगा,' वादा किया था,
'तुम्हारा इंतज़ार करूंगा,' राधिका ने कहा था।
धूप सुनहरी, भविष्य उज्ज्वल,
पर युद्ध ने सबकुछ कर दिया विफल।

शक का बीज:

अफ़वाहों का बाज़ार गर्म,
'वो शहीद हो गया,' शब्द निर्दय, नर्म।
पर दिल मानता नहीं, इनकार है,
एक उम्मीद की लौ अभी भी बरकरार है।
क्या सच में, वो अब नहीं रहा?
या झूठ है ये, कोई और कहानी है छिपा?

अंतिम मुलाकात?

एक घायल सैनिक, अधखुली आँखें,
'विक्रम...' राधिका की काँपती साँसें।
'राधिका... माफ करना...' धीमी आवाज़,
'मैंने... झूठ कहा था... जंग का रिवाज़...'

'मैं डर गया था... तुम्हें खोने से...' कमजोर मुस्कान,
'इसलिए... कहा... शहीद... बनूँगा महान...'
राधिका के आँसू, क्रोध और प्यार,
एक झूठ की कीमत, जीवन का भार।

अंतहीन प्रश्न:

विक्रम की साँसें थम गईं,
राधिका अकेली, दुनिया गमगीन।
क्या प्यार में झूठ जायज़ है कभी?
या सच की कीमत, हर झूठ से बड़ी?

भविष्य धुंधला, रास्ता अनजान,
एक झूठ की कीमत, खोया हुआ जहान।

About This Story

Genres: Poetry

Description: A Hindi poem about love, loss, and the devastating consequences of war, seen through the eyes of a young nurse searching for her soldier lover amidst the ruins.