अजनबी उड़ान
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दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हमेशा की तरह चहल-पहल थी। यात्रियों की भीड़, अनाउंसमेंट की गूंज, और ट्रॉलियों की खड़खड़ाहट – एक सामान्य दिन। मैं अपनी उड़ान के लिए इंतजार कर रही थी, तभी मेरी नज़र उस पर पड़ी। वह एक कोने में खड़ा था, उसकी आँखें भी भीड़ को ही निहार रही थीं, मानो किसी को ढूंढ रहा हो। उसकी आँखों में एक अजीब सी उदासी थी, जो मुझे खींच रही थी।
थोड़ी देर बाद, वह मेरी तरफ आया। “माफ़ कीजिएगा,” उसने कहा, उसकी आवाज़ में एक हल्की सी हिचकिचाहट थी, “क्या आपके पास अतिरिक्त चार्जर है? मेरा फोन डेड हो गया है और मुझे एक ज़रूरी कॉल करना है।”
मैंने मुस्कुराकर अपना चार्जर उसे दिया। “हाँ, ज़रूर। यहाँ लीजिए।”
उसने राहत की सांस ली। “शुक्रिया। मैं इसे जल्द ही लौटा दूंगा।”
उसका नाम अर्जुन था। और हम दोनों बातें करने लगे। पता चला कि हम दोनों ही बैंगलोर जा रहे थे, अलग-अलग काम से। अर्जुन एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर था और मैं एक आर्किटेक्ट। हमने अपने सपनों, अपने डर, और अपने पसंदीदा खाने के बारे में बात की। वह बातें करते वक्त इतना सहज और सच्चा लग रहा था, जैसे हम बरसों से एक दूसरे को जानते हों।
उड़ान के दौरान, हमारी सीटें अगल-बगल थीं। हमने साथ में खाना खाया, खिड़की से बाहर के बादलों को देखा, और हमारी बातें कभी खत्म ही नहीं हुईं। मुझे लगने लगा था कि कहीं न कहीं, हमारे बीच कुछ खास है।
बैंगलोर पहुँचने पर, उसने मेरा नंबर माँगा। “मैं आपसे फिर मिलना चाहता हूँ,” उसने कहा, उसकी आँखों में चमक थी। मैंने खुशी-खुशी उसे अपना नंबर दे दिया।
अगले कुछ दिन सपनों की तरह बीते। हम हर रोज मिलते, कभी कॉफी पीते, कभी फिल्म देखते, कभी बस यूं ही साथ में घूमते। मुझे लग रहा था कि मैं प्यार में हूँ।
फिर, एक दिन, एक दोस्त ने मुझे एक तस्वीर भेजी। वह अर्जुन की थी, किसी और लड़की के साथ, हाथ में हाथ डाले। तस्वीर में वह लड़की अर्जुन को किस कर रही थी। मेरा दिल टूट गया। मुझे लगा जैसे किसी ने मेरे साथ धोखा किया हो।
मैंने अर्जुन को कॉल किया, गुस्से से भरी हुई। “यह क्या है?” मैंने चिल्लाकर कहा।
अर्जुन हैरान था। “क्या हुआ? तुम क्यों गुस्सा कर रही हो?”
मैंने उसे तस्वीर के बारे में बताया। वह चुप हो गया।
“मैं तुम्हें कभी माफ़ नहीं करूँगी,” मैंने कहा और फोन काट दिया।
मैंने उसे ब्लॉक कर दिया और अपने दिल को पत्थर बना लिया। मैंने सोचा कि शायद प्यार मेरे लिए नहीं है।
एक हफ्ते बाद, मेरे दरवाजे पर दस्तक हुई। यह अर्जुन था। उसकी आँखें लाल थीं, मानो वह रो रहा हो।
“मुझे एक बार सुनो तो सही,” उसने कहा, उसकी आवाज़ में दर्द था।
मैंने दरवाजा खोला। अर्जुन ने बताया कि तस्वीर में जो लड़की थी, वह उसकी बहन थी। वह उसे एयरपोर्ट पर लेने आई थी और खुशी में उसने उसे गले लगा लिया था।
मुझे अपनी गलती का एहसास हुआ। मैंने बिना कुछ जाने, बिना सच्चाई का पता लगाए, अर्जुन पर शक किया।
“मुझे माफ़ कर दो,” मैंने कहा, मेरी आँखों में आँसू थे।
अर्जुन ने मुझे गले लगा लिया। “कोई बात नहीं,” उसने कहा, “मैं जानता हूँ कि तुम डर गई थी। लेकिन मुझे खुशी है कि तुमने मुझे सुना।”
हमने फिर से शुरुआत की। इस बार, हमारा प्यार और भी मजबूत था, क्योंकि यह विश्वास और समझ पर टिका हुआ था। मैंने सीखा कि प्यार में शक की कोई जगह नहीं होती, और हमेशा सच जानने की कोशिश करनी चाहिए। और मुझे यह भी पता चला कि कभी-कभी, सबसे खूबसूरत रिश्ते भी एक छोटे से misunderstanding से खतरे में पड़ सकते हैं। लेकिन अगर प्यार सच्चा है, तो वह हर मुश्किल को पार कर सकता है।
थोड़ी देर बाद, वह मेरी तरफ आया। “माफ़ कीजिएगा,” उसने कहा, उसकी आवाज़ में एक हल्की सी हिचकिचाहट थी, “क्या आपके पास अतिरिक्त चार्जर है? मेरा फोन डेड हो गया है और मुझे एक ज़रूरी कॉल करना है।”
मैंने मुस्कुराकर अपना चार्जर उसे दिया। “हाँ, ज़रूर। यहाँ लीजिए।”
उसने राहत की सांस ली। “शुक्रिया। मैं इसे जल्द ही लौटा दूंगा।”
उसका नाम अर्जुन था। और हम दोनों बातें करने लगे। पता चला कि हम दोनों ही बैंगलोर जा रहे थे, अलग-अलग काम से। अर्जुन एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर था और मैं एक आर्किटेक्ट। हमने अपने सपनों, अपने डर, और अपने पसंदीदा खाने के बारे में बात की। वह बातें करते वक्त इतना सहज और सच्चा लग रहा था, जैसे हम बरसों से एक दूसरे को जानते हों।
उड़ान के दौरान, हमारी सीटें अगल-बगल थीं। हमने साथ में खाना खाया, खिड़की से बाहर के बादलों को देखा, और हमारी बातें कभी खत्म ही नहीं हुईं। मुझे लगने लगा था कि कहीं न कहीं, हमारे बीच कुछ खास है।
बैंगलोर पहुँचने पर, उसने मेरा नंबर माँगा। “मैं आपसे फिर मिलना चाहता हूँ,” उसने कहा, उसकी आँखों में चमक थी। मैंने खुशी-खुशी उसे अपना नंबर दे दिया।
अगले कुछ दिन सपनों की तरह बीते। हम हर रोज मिलते, कभी कॉफी पीते, कभी फिल्म देखते, कभी बस यूं ही साथ में घूमते। मुझे लग रहा था कि मैं प्यार में हूँ।
फिर, एक दिन, एक दोस्त ने मुझे एक तस्वीर भेजी। वह अर्जुन की थी, किसी और लड़की के साथ, हाथ में हाथ डाले। तस्वीर में वह लड़की अर्जुन को किस कर रही थी। मेरा दिल टूट गया। मुझे लगा जैसे किसी ने मेरे साथ धोखा किया हो।
मैंने अर्जुन को कॉल किया, गुस्से से भरी हुई। “यह क्या है?” मैंने चिल्लाकर कहा।
अर्जुन हैरान था। “क्या हुआ? तुम क्यों गुस्सा कर रही हो?”
मैंने उसे तस्वीर के बारे में बताया। वह चुप हो गया।
“मैं तुम्हें कभी माफ़ नहीं करूँगी,” मैंने कहा और फोन काट दिया।
मैंने उसे ब्लॉक कर दिया और अपने दिल को पत्थर बना लिया। मैंने सोचा कि शायद प्यार मेरे लिए नहीं है।
एक हफ्ते बाद, मेरे दरवाजे पर दस्तक हुई। यह अर्जुन था। उसकी आँखें लाल थीं, मानो वह रो रहा हो।
“मुझे एक बार सुनो तो सही,” उसने कहा, उसकी आवाज़ में दर्द था।
मैंने दरवाजा खोला। अर्जुन ने बताया कि तस्वीर में जो लड़की थी, वह उसकी बहन थी। वह उसे एयरपोर्ट पर लेने आई थी और खुशी में उसने उसे गले लगा लिया था।
मुझे अपनी गलती का एहसास हुआ। मैंने बिना कुछ जाने, बिना सच्चाई का पता लगाए, अर्जुन पर शक किया।
“मुझे माफ़ कर दो,” मैंने कहा, मेरी आँखों में आँसू थे।
अर्जुन ने मुझे गले लगा लिया। “कोई बात नहीं,” उसने कहा, “मैं जानता हूँ कि तुम डर गई थी। लेकिन मुझे खुशी है कि तुमने मुझे सुना।”
हमने फिर से शुरुआत की। इस बार, हमारा प्यार और भी मजबूत था, क्योंकि यह विश्वास और समझ पर टिका हुआ था। मैंने सीखा कि प्यार में शक की कोई जगह नहीं होती, और हमेशा सच जानने की कोशिश करनी चाहिए। और मुझे यह भी पता चला कि कभी-कभी, सबसे खूबसूरत रिश्ते भी एक छोटे से misunderstanding से खतरे में पड़ सकते हैं। लेकिन अगर प्यार सच्चा है, तो वह हर मुश्किल को पार कर सकता है।
About This Story
Genres: Romance
Description: A chance encounter at a bustling airport ignites an unexpected connection between two souls, only to be threatened by a simple, yet devastating, misunderstanding.