धूप का टुकड़ा, धुएँ का बादल (Dhoop ka Tukda, Dhuen ka Baadal - A Patch of Sunlight, A Cloud of Smoke)

By Amit Kumar Pawar | 2026-01-24 | 2 min read

Story Content

वो टूटा हुआ घर, मिट्टी की दीवारें, यादें पुरानी,
जैसे धूप का टुकड़ा, धुएँ का बादल, कहानी अनजानी।
बचपन बीता गलियों में, हँसी-ठिठोली, खेल निराले,
अब सन्नाटा पसरा है, आँसू भरे, दिल में छाले।

माँ की लोरी, पिता का साया, सब कुछ खो गया,
वक़्त ने कैसा सितम ढाया, हर सपना सो गया।
पर दिल में एक उम्मीद की लौ, अब भी जलती है,
ज़िन्दगी की राहों में, ठोकर खाकर भी संभलती है।

वो पहली बारिश की बूंदें, मिट्टी की सौंधी खुशबू,
जैसे दर्द में भी, एक पल की राहत, एक मीठा आंसू।
वो तारों भरी रातें, खुले आसमान के नीचे,
जैसे अंधेरे में भी, सितारों का साथ, जीवन के पीछे।

हार नहीं मानेंगे, ये दिल ने ठाना है,
हर मुश्किल को पार करके, आगे बढ़ना है।
वो खेत की मिट्टी, हाथों में मेहनत की लकीरें,
जैसे ज़िन्दगी की किताब, लिखी हैं हर तकदीरें।

कभी धूप, कभी छाँव, यही तो है ज़िन्दगी,
कभी खुशी, कभी गम, यही तो है बंदगी।
पर हर हाल में मुस्कुराना है, ये हमने सीखा है,
टूटे हुए दिल से भी, प्यार करना है, ये जाना है।

वो बूढ़ी बरगद का पेड़, सदियों से खड़ा है,
जैसे ज़िन्दगी का सबक, सबको सिखा रहा है।
आँधी, तूफान, सब सहकर भी, वो अड़ा है,
येही है इंसान की कहानी, जो हर युग में जड़ा है।

वो नदी का बहता पानी, कभी रुकता नहीं,
जैसे ज़िन्दगी का सफ़र, कभी थकता नहीं।
हर लहर एक नया संदेश, हर मोड़ एक नयी राह,
चलते रहना है बस, यही है ज़िन्दगी की चाह।

वो चिड़िया का चहचहाना, सुबह की पहली किरण,
जैसे निराशा में भी, उम्मीद की एक नयी किरण।
हर दिन एक नया मौका, हर पल एक नयी आस,
जीना है मुस्कुराकर, यही है ज़िन्दगी का सार खास।

कभी गिरेंगे, कभी उठेंगे, ये तो दस्तूर है,
पर हिम्मत नहीं हारेंगे, ये अपना कसूर है।
क्योंकि इंसान हैं हम, मुश्किलों से लड़ना जानते हैं,
टूटे हुए सपनों को भी, फिर से सजाना जानते हैं।

वो गाँव की पगडंडी, शहर की भीड़-भाड़,
जैसे ज़िन्दगी के रंग, कभी हल्के, कभी गाढ़।
पर हर रंग में जीना है, हर रूप में ढलना है,
क्योंकि इंसान हैं हम, हर हाल में आगे बढ़ना है।

वो बच्चों की हँसी, फूलों की खुशबू,
जैसे ज़िन्दगी की मिठास, हर पल में रूबरू।
हर छोटी चीज में खुशी ढूंढना है, ये हमने जाना है,
क्योंकि ज़िन्दगी एक अनमोल तोहफा है, ये पहचाना है।

कभी अकेले, कभी साथ, यही तो है ज़िन्दगी,
कभी गम, कभी बात, यही तो है बंदगी।
पर हर पल को जीना है, हर लम्हे को संजोना है,
क्योंकि ज़िन्दगी एक खूबसूरत सफर है, ये मानना है।

वो धूप का टुकड़ा, धुएँ का बादल, याद रहेगा,
ये ज़िन्दगी का सफर, हमेशा याद रहेगा।
क्योंकि हमने हर मुश्किल को हँसकर झेला है,
और यही तो इंसान की सच्ची कहानी है, जो हर दिल में बसा है।

तो चलो, फिर से मुस्कुराएँ, फिर से जीएँ,
हर मुश्किल को पार करके, फिर से उड़ें।
क्योंकि हम इंसान हैं, हार मानना नहीं जानते,
ज़िन्दगी की राहों में, बस आगे बढ़ते जाते हैं।

वो आशा की किरण, दिल में हमेशा रहेगी,
ये ज़िन्दगी की जंग, हम जीत कर रहेंगे।
क्योंकि इंसान हैं हम, हिम्मत का दामन थामे हैं,
और अपनी मंज़िल की ओर, हमेशा बढ़ते रहेंगे।

About This Story

Genres: Poetry

Description: A sonnet about the enduring human spirit, finding strength in small joys amidst life's inevitable hardships and losses, and the bittersweet beauty of resilience.