स्मृति-गंध: किताबों का इत्र

By Amit Kumar Pawar | 2026-01-25 | 2 min read

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धूल की एक परत, जैसे बरसों के सन्नाटे की चादर, किताबों पर बिछी हुई थी। ये पुस्तकालय, कभी ज्ञान का मंदिर, अब बस यादों का कब्रिस्तान था। मैं, अनन्या, बरसों बाद यहाँ लौटी थी। शहर बदल गया था, लोग बदल गए थे, पर ये पुस्तकालय… ये वैसा ही था, जैसे मैंने इसे छोड़ा था।

मुझे याद है, यहीं, इसी धूल भरी हवा में, मैंने उसे पहली बार देखा था। विवान। उसकी आँखें, जैसे झील का गहरा पानी, हमेशा कुछ खोजती रहती थीं। हम दोनों, किताबों के दीवाने, यहाँ घंटों बिताया करते थे। प्रेम भी यहीं हुआ, किताबों के पन्नों की तरह धीरे-धीरे, अनकहे शब्दों की तरह गहरा।

आज, मैं यहाँ एक किताब ढूंढने आई थी – 'स्मृति-गंध', कविताओं का एक संग्रह, जो विवान को बहुत पसंद था। शायद, उसी बहाने, मैं अपनी कुछ भूली हुई यादों को फिर से जी लेना चाहती थी।

"अनन्या?" एक धीमी सी आवाज़ ने मुझे चौंका दिया।

मैंने पलट कर देखा। विवान। उसकी आँखों में वही झील का पानी था, थोड़ा और गहरा, थोड़ा और शांत। चेहरे पर बरसों की थकान थी, पर मुस्कान… वही पुरानी, मन को छू लेने वाली मुस्कान।

"विवान! तुम… तुम यहाँ क्या कर रहे हो?" मैंने हकलाते हुए पूछा।

"मैं… मैं यहीं काम करता हूँ," उसने जवाब दिया। "इस पुस्तकालय का रखवाला।"

हम दोनों चुप हो गए। बरसों की दूरी, एक पल में, जैसे सिमट गई। फिर, धीरे-धीरे, बातें शुरू हुईं। पुरानी यादें, नए सपने… हम दोनों ने बहुत कुछ खोया था, बहुत कुछ पाया था। पर, कहीं न कहीं, वो प्रेम, वो एहसास, अभी भी ज़िंदा था।

कुछ दिन बाद, मुझे एहसास हुआ कि कोई हमें देख रहा है। पुस्तकालय में, हमेशा एक अनजान सा साया मंडराता रहता था। मुझे डर लगने लगा। विवान को भी महसूस हुआ कि कुछ ठीक नहीं है।

"मुझे लगता है, कोई हमें अलग करना चाहता है, अनन्या," उसने एक शाम मुझसे कहा।

"कौन? क्यों?" मेरा दिल डर से धड़कने लगा।

"मुझे नहीं पता। पर, मुझे लगता है, ये कोई ऐसा है, जो हमारे अतीत से जुड़ा हुआ है।" विवान की आँखों में चिंता साफ़ झलक रही थी।

धीरे-धीरे, चीजें बिगड़ने लगीं। गुमनाम चिट्ठियाँ, झूठे इल्जाम… कोई हमें बदनाम करने की कोशिश कर रहा था। मैंने विवान से कहा कि हमें पुलिस में शिकायत करनी चाहिए, पर उसने मना कर दिया।

"पुलिस? नहीं, अनन्या। ये मामला पुलिस से सुलझने वाला नहीं है। ये कोई ऐसा है, जिसे हम जानते हैं। कोई ऐसा, जो हमसे बदला लेना चाहता है।"

एक रात, पुस्तकालय में आग लग गई। विवान ने मुझे बचाया, पर खुद बुरी तरह घायल हो गया। अस्पताल में, उसने मुझे बताया कि आग लगाने वाला कौन था – उसकी पहली पत्नी, जो बरसों पहले मर चुकी थी… या कम से कम, ऐसा ही सब मानते थे। वो वापस आ गई थी, और वो विवान को किसी के साथ खुश नहीं देख सकती थी।

विवान बच गया। उसकी पत्नी को गिरफ्तार कर लिया गया। पुस्तकालय जल गया, पर हमारी यादें नहीं जलीं। हमने उस शहर को छोड़ दिया, एक नई शुरुआत करने के लिए। एक नया पुस्तकालय, एक नई जिंदगी… और एक नया प्रेम, जो राख से उठकर, फिर से खिल रहा था। स्मृति-गंध, किताबों का इत्र, हमेशा हमारे साथ रहेगा, याद दिलाता रहेगा कि सच्चा प्रेम, हर मुश्किल को पार कर सकता है।

About This Story

Genres: Romance

Description: A chance encounter in a forgotten library reignites a dormant love, but a shadowy figure threatens to extinguish the flame before it can truly burn. Can they overcome the past and the present danger to find happiness again?