पहाड़ों का श्राप: प्रेम की अंतिम चिट्ठी

By Amit Kumar Pawar | 2026-03-04 | 1 min read

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अर्जुन, गुमसुम, दिल्ली से मनाली की ट्रेन में, पहाड़ों में खोया।

अचानक, मौसम बिगड़ा, बारिश और तूफान ने दहशत फैलाई।

भूस्खलन! ट्रेन पटरी से उतरी, यात्रियों में चीख-पुकार मच गई।

एक मरते हुए यात्री ने अर्जुन को ख़तों का पुलिंदा सौंपा।

खतों में दबी थी नैना और एक अनजान प्रेमी की अधूरी कहानी।

ट्रेन फंसी, संपर्क टूटा, उम्मीदें धुंधली पड़ने लगीं।

अर्जुन ने यात्रियों को संगठित किया, नेतृत्व उभरा।

नैना की तलाश में अर्जुन ने जोखिम भरा सफर शुरू किया।

खतरनाक रास्ते, उफनती नदियाँ, हौसले टूटने लगे।

अर्जुन गाँव पहुंचा, नैना का अतीत सामने आया।

नैना, एक बूढ़ी महिला, खोए प्यार की यादों में डूबी हुई।

ख़तों ने पुरानी यादें ताज़ा कीं, प्यार फिर से जागा।

बचाव दल आया, ज़िंदगी बची, रिश्ता अटूट बन गया।

अर्जुन ने नैना को अलविदा कहा, कहानी पूरी हुई।

अर्जुन ने नैना को खत लिखना शुरू किया, खुद की प्रेम कहानी शुरू हुई।

About This Story

Genres: Romance

Description: दिल्ली से मनाली की ट्रेन यात्रा एक भूस्खलन में बदल जाती है, जहाँ अर्जुन एक अधूरी प्रेम कहानी को पूरा करने के मिशन पर निकलता है, और खुद के प्रेम का अर्थ खोजता है।