पुरानी चाय की प्याली (Purani Chai Ki Pyali - An Old Tea Cup)

By Amit Kumar Pawar | 2026-01-28 | 1 min read

Story Content

सुबह की धूप खिड़की से आती है,
और पुरानी चाय की प्याली,
टेबल पर रखी,
तुम्हारी याद दिलाती है।

वो चाय की दुकान,
नुक्कड़ वाली,
जहाँ हम घंटों बैठते थे,
बिना कुछ कहे,
बस,
एक दूसरे को देखते थे।

तुम्हारी हंसी,
जैसे गुनगुनाती नदी,
मेरे कानों में अब भी गूंजती है,
हालांकि,
तुम्हारे होंठों पर,
अब किसी और का नाम है।

याद है,
पहली बारिश में,
भीगते हुए,
हमने एक दूसरे का हाथ थामा था?
वो हाथ,
अब किसी और की उंगलियों में है।

पुरानी चाय की प्याली,
ठंडी हो चुकी है,
जैसे हमारे बीच की गर्माहट।
उसकी दरारों में,
छिपी हैं हमारी बातें,
अनकहे किस्से,
अधूरे सपने।

मैंने सोचा था,
हम साथ चलेंगे,
दूर तक,
एक ही रास्ते पर।
लेकिन,
रास्ते बदल गए,
और तुम,
किसी और के साथ,
आगे बढ़ गई।

ये प्याली,
तुम्हारी पसंदीदा थी,
तुम हमेशा इसमें,
अदरक वाली चाय पीती थी।
मुझे याद है,
तुम्हारी नाक,
अदरक की खुशबू से,
गुदगुदी पाती थी।

अब,
मैं अकेला बैठा हूँ,
इस प्याली के साथ,
तुम्हारी यादों में डूबा हुआ।
चाय की हर चुस्की,
तुम्हारी कमी महसूस कराती है।

मैंने कोशिश की,
तुम्हें भूलने की,
नई शुरुआत करने की।
लेकिन,
तुम्हारी तस्वीर,
दिल से मिटती ही नहीं।

ये पुरानी चाय की प्याली,
एक सबूत है,
हमारे प्यार का,
जो कभी था,
और अब,
सिर्फ एक याद बनकर रह गया है।

मैं जानता हूँ,
तुम्हें भी,
कभी-कभी,
हमारी याद आती होगी।
लेकिन,
ज़िन्दगी आगे बढ़ जाती है,
और हमें,
उसके साथ चलना होता है।

फिर भी,
ये प्याली,
हमेशा रहेगी,
एक मौन गवाह,
हमारे खोए हुए प्यार की।
और हर सुबह,
मैं इसमें चाय पियूँगा,
तुम्हारी याद में,
एक आंसू गिराकर।

शायद,
कभी,
किसी मोड़ पर,
हम फिर मिलेंगे।
लेकिन,
तब तक,
ये प्याली,
तुम्हारी निशानी,
मेरे पास रहेगी।

और मैं,
तुम्हें,
हमेशा याद रखूँगा।
चाहे तुम,
कितनी भी दूर चली जाओ।

About This Story

Genres: Poetry

Description: A poem about the lingering memories and quiet grief after a love has faded, using the simple image of an old tea cup as a symbol of shared moments and unspoken words.